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चाँदनी सा दिलकश सोन्दर्य

आसमानो में बिखरी चाँदनी सातुम्हारा दिलकश सोन्दर्य,हल्के से अंधेरे में लिपटे चाँद सातुम्हारा पूरकशिश चेहरा,रातो की स्याही में झिलमिल करतेसितारो जैसीतुम्हारी पुरसकून आँखे,फ़िज़ाओ में अठखेलियां करतीहवाओं सातुम्हारा चंचल अंदाज,आसमाँ से उतर कर सागर को
 
Ishwar
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दुविधा

हर सुबह तो ऐसी नही होतीहर शाम तो ऐसे नही ढलतीकभी कभी जिंदगीउस मुकाम पर ले आती हेंकोई शब गुज़ारे नही गुज़रतीलम्हे हज़ार आते हेंदौरा-ए-उम्र के दरम्यानहर लम्हे पर तो येआँख भी नही भरती.
 
Ishwar
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दिल का टुकड़ा

खुश्बू हो सुगंध हो,मेरे आगंन की महक हो तुम.संगित हो सरगम हो,मेरे दिल की धड़कन हो तुम.दुआ हो सजदा हो,मेरे खुदा की रजा हो तुम.मासुम हो नादान हो,मेरे दिल का टुकड़ा हो तुम.
 
Ishwar
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Ishwar :- में राइटर नही हूँ पर दिल ने जब कुछ महसूस किया मैने अपना { ख्याल } लिख लिया !

मेरे दिल की विरानीयों मेंआज भी फूल खिलते हें कभी कभी.मेरे अरमानो की ठंडी राख मेंआज भी शोले भड़कते हें कभी कभी.जब भी इस कायनात में कहीआती हें खुश्बू उसके सांसो की.फ़िज़ा में उस खुश्बू का अहसास करता हू में कभी कभी.
 
Ishwar
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तेरा ख्याल

हर सांस खुशबू की मानिंद,हर आह तेरी प्यास हे.अपना उसे बना ना सके जो,दिल की दुनिया उदास हें.दिल के किसी कोने की हलचल,नाम तेरा चुपके से लेती हें.तू ना तेरा ख्याल सही,मेरी मोहब्बत ये कहती हें.क़ैद बंधनो की बेड़ियो से हूं,चाहत ना कर पाउंगा पूरी.रिश्ता ना अपना
 
Ishwar
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तुम कौन हो ?

तुम कौन हो ?फलक पर चमकता चाँद,या कोई रोशन सितारा.गुलशन में खिला सुर्ख गुलाब,या किसी झील का कंवल!तुम कैसी हो ?रात की चाँदनी जैसी,या फुलो की खुशबू जैसी.नगमो की सरगम जैसी,या बदली की घटाओ जैसी!तुम कहाँ हो ?अपने आँगन में,या मेरे ख्वाबो में.इस जमी पे ,या मेरे
 
Ishwar
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खामोशी

सूरज कि धुप कुछ कुछ मलिन सी लगती हैं,मिट्टी से आती खुश्बू भी कुछ ग़मगिन सी लगती हैं,हर ओर पसरा हे सन्नाटा-छाई हे खामोशी,आज फिर मन पर छाई हे गहरी उदासी
 
Ishwar
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