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एक चिड़िया मरी पड़ी थी

एम वर्मा हिन्द-युग्म के अत्यधिक सक्रिय पाठक-कवियों में से हैं। एकबार हिन्द-युग्म के यूनिकवि भी रह चुके हैं। मई 2010 की यूनिकवि प्रतियोगिता में भी इनकी एक कविता ने दसवाँ स्थान बनाया।पुरस्कृत कविता: एक चिड़िया मरी पड़ी थीबलखाती थीवह हर सुबह धूप से बतियाती
 
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अपनी आँखों में सपने हैं उनकी में सुख सारे

हिन्द-युग्म के पाठक अवनीश सिंह चौहान की कविताओं से परिचित हो चुके हैं। मई 2010 की यूनिकवि प्रतियोगिता में प्रस्तुत कविता ने नवाँ स्थान बनाया है। पुरस्कृत कविता: किसको कौन उबारेबिना नाव के माझी मिलतेमुझको नदी किनारेकितनी राह कटेगी चलकरउनके संग
 
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वो सच नहीं है जो कथा में लिखा जाता है गाँव

मई माह की यूनिकवि प्रतियोगिता की 8वीं कविता सुरेन्द्र अग्निहोत्री की है। सुरेन्द्र की एक कविता जनवरी महीने की यूनिकवि प्रतियोगिता के शीर्ष 11 में चुनी गई थी। शीर्ष 10 में आने का इनका पहला मौका है।पुरस्कृत कवितावो सच नहीं है जो कथा में लिखा जाता है
 
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देवेश पाण्डेय जनवरी 2010 से हिन्द-युग्म पर सक्रिय हैं। यह इनकी तीसरी रचना है जिसने मई 2010 की यूनिकवि प्रतियोगिता में सातवाँ स्थान बनाया है।पुरस्कृत कविताः माँ1-माँ क्या है?एक शब्द एक भाव एक खुश्बूएक ध्वनि एक दृश्य !क्या है माँ .....? जब पैदा हुआ तो
 
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पुरानी दीवारें और नया कवि

हर माह यूनिप्रतियोगिता के माध्यम से हिंद-युग्म से कई नये कवि भी जुड़ते हैं। प्रतियोगिता की पाँचवी कविता भी एक नये कवि की है। रचनाकार प्रदीप शुक्ला की यह हिंद-युग्म पर प्रथम कविता ही है। 10 अगस्त 1978 को जन्मे प्रदीप जी मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। गणित
 
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खाप सरपंच

यूनिप्रतियोगिता की चौथे स्थान की कविता के द्वारा एक नये कवि हिंद-युग्म के मंच से जुड़ रहे हैं। कविता के रचनाकार वसीम अकरम की हिंद-युग्म पर यह पहली कविता है। उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद से तअल्लुक रखने वाले वसीम वर्तमान मे दिल्ली मे स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर
 
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सपने टूटे: राजेंद्र स्वर्णकार की कविता

यूनिप्रतियोगिता की पाँचवीं कविता के रचनाकार राजेंद्र स्वर्णकार हैं। हिंद-युग्म से उनका जुड़ाव पिछले माह की प्रतियोगिता से ही हुआ है, जबकि उनकी कविता नवें पायदान पर रही थी। मूलत: छंदबद्ध कविताएं रचने वाले राजेंद्र जी अपने गीतों व ग़ज़लों को सुरबद्ध कर
 
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आंच चिढाती है आतिश

मई माह की यूनिप्रतियोगिता मे दूसरा स्थान स्वप्निल कुमार ’आतिश’ की ग़ज़ल ने पाया है। आतिश पिछले कुछ समय से ही हिंद-युग्म से जुड़े हैं, मगर कवि और पाठक के तौर पर उनकी सक्रियता उदाहरण के योग्य रही है। इनकी पिछली गज़लें भी यूनिप्रतियोगिता मे ऊपर के पायदानों
 
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मई माह की यूनिप्रतियोगिता के परिणाम

कविता अपने समय से संवाद करने की महत्वपूर्ण कड़ी है, तो उसे आइना दिखाने और उसकी विद्रूपताओं को उजागर करने का माध्यम भी। हिंद-युग्म यूनिप्रतियोगिता के द्वारा समकालीन कविता मे हमारे समय के पदचाप खोजने का प्रयास करता है। इस बार हिंद-युग्म मई माह की
 
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