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तारीख पर तारीख-हिन्दी हास्य व्यंग्य (tarikh par tarikh-hindi hasya vyangya)

उसे एक ट्रक ने कुचल दिया और उसके बाद वह कौमा में चला गया। उसके परिवार वालों ने मामला दर्ज कराया। मुकदमा चला पर तारीख दर तारीख लगती रही। इधर परिवार वाले परेशान थे। उनको एक मनोचिकित्सक ने बताया था कि जब उनके मरीज को दिमागी रूप से बहुत आघात पहुंचा है जब
 
दीपक भारतदीप
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श्वान पर गोली-हिन्दी हास्य व्यंग्य (bullet on dog-hindi hasya vyanga)

उस बालक ने श्वान पर ही प्रस्तर प्रहार किया था। जब बालक श्वान पर प्रहार करने वाला था तो उसने देख लिया और भाग गया। बालक का निशाना भी कोई अचूक नहीं था और वह हमारे साइकिल के बीचों बीच निकल कर पास से निकल रहे एक स्कूटर को जा लगा। स्कूटर चालक के साथ एक महिला
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नये और पुराने राजा-हिन्दी लेख (new and old king-hindi article)

पुराने समय के राजाओं महाराजाओं की आलोचना खूब होती है पर उनकी कुछ विशेषतायें अब याद आती हैं। इन राजाओं ने अपने रहने के लिये महल और किले बनवाये तो जनता के पीने के लिये जलाशय, मनोरंजन के लिये बड़े बड़े उद्यान तथा अन्य सुविधाओं क लिये इमारतों का निर्माण
 
दीपक भारतदीप
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नतीजा यह कि कोई सुखी नहीं-हास्य व्यंग्य (natija yah ki koyee sukhi nahin-hasya vyanaya)

पश्चिमी वैज्ञानिकों ने एक शोध किया है जिसके अनुसार लोग अपने दुःख से कम दूसरे के सुख से अधिक तनाव ग्रस्त रहते हैं। 24 देशों के 19 हजार लोगों पर यह शोध किया गया है। इससे पता चलता है कि लोग अपने वेतन कम होने से नहीं बल्कि दूसरे की ज्यादा है इससे ज्यादा
 
दीपक भारतदीप
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गुलाब के साथ कांटे-हिन्दी लेख (gulab ke sath kante-hindi lekh)

भारत में भी शादी के बाद तलाक की घटनायें बढ़ रही हैं। पहले जब बुजुर्ग लोगों के श्रीमुख से पश्चिमी देशों के मुकाबले अपने देश की संस्कृति, संस्कार और स्वभाव के श्रेष्ठ होने की बात सुनते थे तो उनका तर्क यही होता था कि वहां तलाक ज्यादा होते हैं, वहां की
 
दीपक भारतदीप
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महल और सिंहासन पर विराजमान लोग-हिन्दी शायरी (mahal aur sinhasan par virajman log)

अपनी खुशी पर हंसने की बजायदूसरे के सुख रोतेइसलिये इंसान कभी फरिश्ते नहीं होते।मुखौटे लगा लेते हैं खूबसूरत लफ़्जों कादरअसल काली नीयत लोग छिपा रहे होते। दौलत के महल में बसने वालेखुश दिखते हैं, मगर  गरीब की पल भर की खुशी पर वह भी रोते।सोने के
 
दीपक भारतदीप
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मुफ्त का मजा-हिन्दी शायरी (muft ka mazaa-hindi shayari)

सिंहासन पर बैठे लोगों कोफरिश्ता क्यों समझ जाते हो,उनके गुलामों की महफिल मेंबजता है चमचा रागउसे संगीत समझ कर बहल क्यों जाते हो।बिकती है इंसानों की अदायें भीपर्दे पर देख कर दृश्यअसली जिंदगी से तोलने क्यों लग जाते हो।सर्वशक्तिमान को जोर से भोंपू बजाकरजगाने
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आधुनिक युग का मूलमंत्र-हिन्दी शायरी (adhunik yug ka mulmantra-hindi shayari)

गरीबी हटाओ,धर्म बचाओऔर चेतना लाओजैसे नारों से गुंजायमान हैपूरा का पूरा प्रचार तंत्र।चिंतन से परे,सुनहरी शब्दों से नारे भरे,और वातानुकूलित कक्ष मेंवक्ता कर रहे बहस नोट लेकर हरे,खाली चर्चा,निष्कर्ष के नाम पर काले शब्दों से सजा पर्चा,प्रचार के लिये बजट
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कंप्यूटर पर लिखने का अपना तरीका-हिन्दी लेख (writing on computer in hindi)

अंतर्जाल पर अगर लिखते रहें तो अच्छा है, पर पढ़ना एक कठिन काम है। दरअसल लिखते हुए दोनों हाथ चलते हैंे और आंखें बंद रहती हैं तब तो ठीक है क्योंकि तब सामने से आ रही किरणों से बचाव होने के साथ दोनों हाथों के रक्त प्रवाह का संतुलन बना रहता है। लिखते हुए आंखें
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ज़िंदगी का सबसे बड़ा अर्थ-हिन्दी शायरी (zindagi ka arth-hindi shayari)

जो चले हैं स्वयं कालिख की राह, उनसे स्वच्छ चरित्र के लियेप्रमाण पाने की चाह,एकदम व्यर्थ है,काला अक्षर भैंस बराबर मानते जो लोगउनके लिये गाय के गुण में भी अनर्थ है। हर इंसान ढूंढता हैअपने ही जैसे साथीअच्छा यह बुरा होना नहीं कोई शर्त है। दागदार है जिनके
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नज़र-हिन्दी शायरी (nazar-hindi shaayri)

रास्ते पर खींचता हुआसरियों से लदा ठेला,पसीने से अंग अंग जिसका नहा रहा है,कई जगह फटे हुए कपड़ों सेझांक रहा है उसका काला पड़ चुका बदन,मगर उस मजदूर की तस्वीर बाज़ार में बिकती नहीं है,इसलिये प्रचार में दिखती नहीं है।सफेद चमचमाता हुआ वस्त्र पहने,वातानुकूलित
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चूहे का वेश छोड़ना होगा-हिन्दी शायरी (choohe ka vesh-hindi shayri)

हाथ जलने के डर सेदियासलाई नहीं जलायेंगेतो फिर रौशनी भी नहीं पायेंगे।चूहों की तरह अंधेरे में छिपने की आदत हो गयी तोहर जगह बिल्लियों के आंतक तलेअपना जीवन बितायेंगे।कभी न कभी तो लड़ना होगा,चूहे का वेश छोड़ इंसान बनना होगाआग जलने दो अनाचार के खिलाफवह ताकतवार
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अच्छी थी अपनी तन्हाई-हिन्दी शायरी (apni tanhaii-hindi shayari)

ख्याल आया इंसानों से जुड़ने का,अकेलेपन से भीड़ के रास्ते मुड़ने कामगर बहुत जल्दी आ गयीसामने जिन्दगी की सच्चाई।मुफ्त में प्यार नहीं मिलता,धोखे के बिना व्यापार नहीं हिलता,चीख रहे हैं लोगअपनी बेहाली छिपाने के लिये,मुस्कराहट ला रहे चेहरे पर जबरनदिल का खालीपन
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समाज एक कारखाना-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (society is a factory-hindi satire poem)

समाज एक कारखाना और परिवार एक उत्पादित है उन बुद्धिजीवियों के लियेजो सजाते हैं अपने ख्यालों मेंबड़े करीने से,ढूंढते हैं परिवारों में टूटने बिखरने की कहानियांवाद और नारे से आगे उनकी सोच नहीं जाती,जिसे कई बार दोहराते इनामों की थाली उनके घर सजकर आती,जगा रहे
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टी-ट्वंटी में बीसीसीआई टीम का तमाशा खत्म-हिन्दी लेख (T-20 world cricket cup-hindi article)

वेस्टइंडीज ने बीसीसीआई की क्रिकेट टीम को बीस ओवरीय प्रतियोगिता में हराकर लगभग बाहर कर दिया हैै और श्रीलंका से आखिरी मैच केवल औपचारिक ही रह गया है।आईपीएल में भारी कमाई कर चुके बीसीसीआई के खिलाड़ी उसका बोझ बीस ओवरीय विश्व कप प्रतियोगिता में नहीं उठा पायेंगे
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जज़्बात सौदे की तरह बांटते-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (jazbat saude ki tarah bantte-hindi vyangya kavitaen)

इतिहास के पन्नों मेंदर्ज खूनखराबे के हादसो में सेवह अपने ख्याल के मुताबिकपढ़कर आते हैं।बैठकर महफिलों मेंफिर उन पर आंसु बहाते है,खून का रंग एक जरूर मानते परख्यालों न मिलते हों तोकई इंसानों के खून भी उनको पानी की तरह मानकर नज़र फेर जाते हैं।-------कुछ
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ऊंचे लोगों की पसंद कितनी ऊंची-हिन्दी व्यंग्य (oonche log, oonchi pasand-hindi vyangya)

अब ऊंचे पदों पर बैठे लोगों को देखने का हमारा नज़रिया वैसा नहीं रहा जैसे पहले था। जिस तरह ऊंचे ऊंचे लोग अब जेलों में जा रहे हैं उसके बाद तो लगता है कि ऐसी ऊंचाईयों से गिरने के भी बहुत सारे खतरे हैं। जब हम छोटे थे तो ऊंचे ऊंचे सपने देखते थे जिनमें हमें अपने
 
दीपक भारतदीप
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गरीब देश की पहचान मिटाने का विकल्प-हिन्दी व्यंग्य कविताऐं (gareeb desh ki pahachan mitane ka sankalp-hindi vyangya kavitaen)

देश की गरीबी ऐसी पहेली हैजिसे वह बूझ रहे हैं।इसलिये वह बना रहे हैं नये राजा महाराजा,बजायेंगे शराब पीकर और जुआ खेलकरजो दुनियां के सामने तरक्की का बाजा,उनके रहने के वास्तेमशहूर जगहों परमहल बनाने की तैयारी मेंगरीबों को अपनी झौंपड़ियों समेतदूरदराज इलाके में
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मशहूर-हिन्दी शायरी (mashahur or famous-hindi shayri)

कुछ इंसानों के दौलतमंद बनने के किस्सेज़माने में मशहूर हो जाते हैंक्योंकि गरीब दुनियां में हैं ज्यादाउनमें दिल लगाने को मजबूर हो जाते हैं।अवाम भटके अक्ल की राह,देख भरे हस्तियों को आह, काबू में रखने के लिये भीड़ कोसौदागर बेचते हैं सपनेजिन्हें देखते देखते
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अनमोल तोहफ़ा-हिन्दी शायरी (anmol tohfa-hindi shayri)

तूफान जैसा क्योंभागना चाहते हो,हवा की तरह बहने में भी मजा आता है।उम्र कम है तेजी से दोड़ने वालों कीबढ़ती गति के साथडोर टूट जाती है ख्यालों कीआसमान छूने की चाहत बुरी नहीं हैपर तारे हाथ आयें या चंद्रमापत्थर के टुुकड़ों या मिट्टी के ढेर के अलावा हाथ क्या आता
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मोहब्बत के जज़्बात-हिन्दी शायरी (mohbbat ke jazbat-hindi shayri)

इश्क के चर्चे जमाने में बहुत हुए,जो एक हुए दो बदनलोगों ने बीता कल मान लिया।जो उतरा हवस का भूततो घर का बोझ दिमाग पर बढ़ने लगाजिंदगी में फिर कभी इश्क का नाम न लिया।----------जो पत्नी को प्रियतमा न समझेभटके हैं प्यार पाने के लिये इस दर से उस दर।दिल में पल
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फ़रिश्ते-हिंदी शायरी (farishtey-hindi shayri)

तंग गली में दिन गुजारने वालों सेरोशन ख्याल की उम्मीद क्यों करते हो,नीयत है जिनकी काली उन सफेदपोशों से भले की उम्मीद क्यों करते हो.लगता है जिंदगी की हकीकतों को नहीं जानते इसलिए इंसानी खोल ओढ़े जो बुत अपनी भूख बहुत ढेर सारी दौलत   से नहीं मिटा सके और
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भ्रष्टाचार से लड़ाई-हिन्दी व्यंग्य क्षणिकायें (fight against curruption-hindi satire poem)

भ्रष्टाचार के खिलाफलड़ने को सभी तैयार हैंपर उसके रहने की जगह तो कोई बताये,पैसा देखकरसभी की आंख बंद हो जाती हैचाहे जिस तरह घर में आये।हर कोई उसे ईमानदारी से प्यार जताये।----------सभी को दुनियां मेंभ्रष्ट लोग नज़र आते हैं,अपने अंदर झांकने सेसभी ईमानदार
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इल्जाम से डरते हैं-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (ilzam-hindi satire poem)

विश्वास तो करते हैंपर साथ में धोखे कीगुंजायश भी रखते हैं।वफा का आसरा करते हमेशापर घाव की मरहम भी साथ रखते हैं।टूटे और बिखरे हैं कई बारफिर भी कभी इरादा नहीं बदलाकोई हम पर धोखे और बेवफाई का इल्जाम लगाएइस बात से डरते हैं।---------अपने गुस्से और घमंड सेलोगों
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शब्द मंद हो गये हैं-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (real word is slow-hindi comic poem)

हर तरफ घूम रहे हाथ में खंजर लिये लोगकिसी से हमदर्दी का उम्मीद करनाबेकार हैपहले कोई किसी के पीठ मेंघौंपकर आयेगा,फिर अपनी पीठ को बचायेगा।भला कब किसी कोदर्द सहलाने का समय मिल पायेगा।----------दौलत, शौहरत और ताकत केघोड़े पर सवार लोगगिरोहबंद हो गये हैं।हवा के
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तसल्ली होती है कि कोई तो सच बोलता है- हिंदी व्यंग्य चिंतन (parsan aud true-hindi article)

सम्मानों पर चल रहे विवादों पर अगर किसी ने उल्लेखनीय बात कही तो वह भारत के स्नूकर खिलाड़ी यासीन मर्चेंट ने!  उन्होंने कुछ लोगों को सम्मान देने के बारे में सवाल करते हुए पूछा है कि क्या वह समाज के लिये आदर्श हो सकते हैं?अब हमारे समझ में आ गया है कि
 
दीपक भारतदीप
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धोती और टोपी-हिन्दी हास्य व्यंग्य (dhoti aur topi-hindi hasya vyangya)

दीपक बापू जल्दी जल्दी सड़क पर जा रहे थे, सामने से थोड़ी दूरी पर स्कूटर पर सवार फंदेबाज आता दिखा। उनका दिल बैठ गया वह सोचने लगे कि ‘यह अब समय खराब करेगा। इससे बचने का उपाय भी तो नहीं है।’ फिर उन्होंने देखा कि वह तिराहे से गुजर रहे हैं और तत्काल अपने बायें
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आज बसंत पंचमी है-आलेख (today basat panchami-hindi article)

इस बार की बसंत पंचमी में सर्दी का प्रकोप घेर कर बैठा है। कहीं से भी ऐसा नहीं लग रहा कि मौसम समशीतोष्ण हुआ हो, अलबत्ता लगता है कि सर्दी थोड़ा कम है पर इतनी नहीं कि उसके प्रति लापरवाही दिखाई जा सके। अगर पर्व की बात करें तो बसंत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है।
 
दीपक भारतदीप
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एक पर्स की कहानी (a pars-Hindi parsnal story)

एक बेजान पर्स की भी कहानी हो सकती है! क्यों नहीं, अगर वह सब्जी की तरह कटने का जुमला उस पर फिट हो सकता है तो कोई कहानी भी हो सकती है। पर्स में माल होता है और माल के पीछे धमाल! धमाल पर्स नहीं करता, बल्कि आदमी करते हैं इसलिये कहानी तो बन ही जाती है। उस दिन
 
दीपक भारतदीप
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लेखक कभी बिचारे नहीं होते-हिन्दी शायरी (lekhak kabhi bichare nahin hote-hindi shayri)

कागज को स्याही से रंगने वालेशब्दों की मय पीने वालेलेखक कभी बिचारे नहीं होते।कलम को चलाकर  घिसेंया टंकण पटल पर उंगलियां नचायें,पढ़ने वालों का अच्छे लगें या बुरेपर लिखने वाले का दिल बहलायेंशब्द कभी बिना सहारे नहीं होते।बहा रहे हैं पसीना,चुन रहे हैं
 
दीपक भारतदीप
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किस्सा कहानी चोरी का-व्यंग्य आलेख (theft story-hindi satire)

यह पेज पता नहीं उस लेखक के उपन्यास पर फिल्म बनी हैं या नहीं-जैसा कि वह दावा कर रहा है। बहरहाल फिल्म के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष निर्माता-कई जगह नायक का अभिनय करने वाले अभिनेता भी फिल्म में पैसा लगाते हैं पर जाहिर नहीं करते-इससे इंकार कर रहे हैं। फिल्म
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लगातार दर्द से संवेदनायें मर जाती हैं-व्यंग्य चिंतन (cold wave-hindi satire

टीवी चैनलों वाले भी क्या करें? उनको हमेशा ही सनसनीखेज की जरूरत है, वह न मिलें तो उसका एक ही उपाय है कि होता है कि हर खबर को सनसनीखेज खबर बनाया जाये। जब हर दस मिनट में ‘ब्रेकिंग न्यूज’ देना है तो फिर चाहे जो खबर पहली बार मिले उसे ही चला दो। कोहरा कोई खास
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नया वर्ष और सितारों के सितारे-हिन्दी व्यंग्य लेख (happy new year and srar of star-hindi vyangya lekh)

धरती के सितारों को अपने सितारों की फिक्र नहीं जितनी कि उनके चेहरे, अदायें और मुद्रायें बेचने वालों को है। धरती के बाकी हिस्से का नहीं पता पर भारतीय धरती के सितारे तो दो ही बस्तियों में बसते हैं-एक है क्रिकेट और दूसरी है फिल्म। यही कारण है कि टीवी चैनल
 
दीपक भारतदीप
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नया वर्ष आ रहा है-हिन्दी व्यंग्य (happy new year coming-hindi satire article)

छोटे शहर के आदमी के लिये यही एक उलझन है कि उसके घरेलू और सामाजिक संस्कार कुछ दूसरे हैं जबकि बाह्य रूप से अनेक बार औपचारिक होकर दूसरे संस्कारों को निभाना पड़ता है। जिनमें अपने यहां ईसवी संवत् तो हमारे जैसे लोगों के लिये हमेशा अजूबा रहा है। जब नया साल आ
 
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इतिहास और विश्वास-हास्य व्यंग्य (ithas aur vishvas-hasya vyangya)

इस देश में कई ऐसे लोग मिल जायेंगे जो इतिहास विषय को बहुत कोसते हैं क्योंकि उनको प्रश्नपत्रों को हल करते समय अनेक घटनाओं की तारीखें और सन् याद नहीं रहते और गलत सलत उत्तर हो जाने पर परीक्षा में उनके अंक कम हो जाते हैं। वैसे इतिहास पढ़ते समय हमें भी मजा
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आखिर मनुष्य एक समझदार प्राणी है-आलेख (men is a social parson-hindi article)

वैश्यावृत्ति और जुआ खेलना ऐसी सामाजिक समस्यायें हैं और इनसे कभी भी मुक्ति नहीं पायी जा सकती। वैश्यावृत्ति पर कानून से नियंत्रण पाना चाहिए या नहीं इस पर अक्सर बहस चलती है। कुछ लोगों को मानना है कि वैश्यावृत्ति को कानून से छूट मिलना चाहिए तो कुछ लोगों
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प्रत्याशी पति-हिन्दी व्यंग्य लेख

उस दिन एक आटो रिक्शा से बार बार लाउडस्पीकर पर दोहराया जा रहा था कि अमुक महिला को पार्षद पद पर मोहर लगाकर विजयी बनाईये। पहली बार जब कान में यह शब्द गूंजा तो हमें पार्षद पद की जगह पति शब्द सुना ही दिया। फिर जब दूसरी बार ध्यान दिया तो पता लगा कि पार्षद
 
दीपक भारतदीप
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विश्व में जातियों का विभाजन खत्म नहीं हो सकता-हिन्दी आलेख (hindu cast and religion-hindi lekh)

क्या देश में समाज से कभी जाति समाप्त हो सकती है? अनेक लोग दिन रात यह संदेश गाते फिरते हैं कि यहां जाति प्रथा समाप्त हो जाये। यह संभव नहीं लगता। अगर पाश्चात्य विचाराधाराओं के आधार पर कोई इस बात का ख्वाब देखता है तो वह एक ऐसा ख्वाब देख रहा है जिसके पूर
 
दीपक भारतदीप
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फैशन की मार-हिन्दी हास्य व्यंग (fashan ki mar-hashya vyangya)

अखबार में पढ़ने को मिला कि ब्रिटेन में महिलायें क्रिसमस पर ऊंची ऐड़ी (हाई हील) के जूते पहनने के लिये इंजेक्शन लगवा रही हैं। उससे छह महीने तक ऐड़ी में दर्द नहीं होता-भारतीय महिलायें इस बात पर ध्यान दें कि अंग्रेजी दवाओं के कुछ बुरे प्रभाव ( साईड इफेक्ट्स
 
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एक बूंद रौशनी-हिन्दी लघु कथा (ek boond roshni-hindi short story)

बड़े शहर के विशाल मकान में रहने वाला वह शख्स एक दिन बरसात के दिनों मे गांव की ओर जाने वाली पगंडडी पर पानी मे अंधेरे में कांपते हुए कदम रखता हुआ आगे बढ़ रहा था। दरअसल शाम के समय वह बस मुख्य सड़क पर उतरा था उस समय बरसात धीरे शुरु हुई थी। उसे गांव जाना था
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