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जज़्बात एक शय है-.हिन्दी शायरी

इंसान के जज्ब़ात शर्त से और समाज के सट्टे के भाव से समझे जाते हैं। नये जमाने में जज़्बात एक शय है जो खेल में होता बाल व्यापार में तौल का माल नासमझी बन गयी है जज़्बात का सबूत जो नहीं फंसते जाल में वह समझदार शैतान समझे जाते
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हमदर्दी जताने में कमाई-हिन्दी क्षणिका

हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। शायद लोग दिमाग से सोचते हैं इसलिये हमदर्दी के शब्द जल्दी ढूंढ लेते दिल तक नहीं पहुंचता दूसरे का दर्द कर लेते हैं दिखावे में कमाई। नहीं करना सीखा
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हिंसक तत्वों के साथ मानवाधिकारों का प्रश्न-हिंदी लेख (With violent elements of human rights questions – Hindi article)

वर्तमान भौतिकवादी युग में यह मानना ही बेवकूफी है कि कोई बिना मतलब के जनसेवा करता है। अगर लाभ न हो तो आदमी अपने रिश्तेदार को पानी के लिये भी नहीं पूछता। वैसे यह मानवीय प्रवृत्ति पुराने समय से है कि बिना मतलब के कोई किसी का काम नहीं करता पर आजकल के समय में
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अपनी रचनाएँ भुनाओ-हास्य कविता (apni rachna-hindi hasya kavita)

श्रृंगार रस का कवि पहुंचा हास्य कवि के पास लगाये अच्छी सलाह की आस और बोला ‘यार, अब यह कैसा जमाना आया समलैंगिकता ने अपना जाल बिछाया। अभी तक तो लिखी जाती थी स्त्री पुरुष पर प्रेम से परिपूर्ण कवितायें अब तो समलिंग में भी प्रेम का अलख जगायें वरना जमाने से
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मंगलवार का दिन भारी-व्यंग्य आलेख (bhartiya jyotish ki jay ho-hasya vyangya-in hindi)

सप्ताह में सात दिन और दिन में 24 धंटे पर मंगलवार का सुबह 11.45 मिनट का समय सभी लोगों के लिये भारी होता है-जी नहीं! यह खबर किसी भारतीय ज्योतिषवेता की नहीं बल्कि पश्चिम के शोधकर्ताओं की है। इसे शिरोधार्य करना चाहिये क्योंकि वह तमाम तरह के प्रयोग करते हैं
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बजट सत्य-हास्य व्यंग्य (hindi vyangya on budget)

उन्होंने जैसे ही दोपहर में बजट देखने के लिये टीवी खोला वैसे ही पत्नी बोली-‘सुनते हो जी! कल तुमने दो हजार रुपये दिये थे सभी खर्च हो गये। अब कुछ पैसे और दो क्योंकि अभी डिस्क कनेक्शन वाला आने वाला होगा। कुछ देर पहले आया तो मैंने कहा कि बाद में