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अब जोश और रोमांच के साथ जागो पूरी रात

बचपन से ही आदत रही देर रात तक जग कर पढ़ने की। वहीं दूसरी तरफ घर में किसी को भी देर रात जगने की आदत नहीं थी। सब के सब जल्द सो जाते थे। वहां वो सोते यहां पर मेरा जगना और लगभग कई बार तो सुबह तक पढ़ना जारी रहता था। याद है वो रातें जब मैं पढ़ा करता था।पर हर
 
Nitish Raj
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