पसंद करें
3
नापसंद करें

प्रकृति के रंग में भंग डालता आत्महंता मनुष्य

सब नाटकों से बड़ा बहुत बड़ा एक नाटक जीवन में रचा जाता रहता है हर पल जहाँ कुछ तो जाना पहचाना होता रहता है और कुछ एकदम अनज़ाना घटता रहता है इस नाटक का निर्देशन प्रकृति करती है प्रकृति के इस नाटक के पात्र हमेशा बदलाव की तलाश में लगे रहते हैं आकाश के असीमित
 
स्वार्थ