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व्यंग्यकार को विचारों से क्रांतिकारी भी होना चाहिए - प्रो. नंद चतुर्वेदी

होली व्यंग्य विशेषांक का विमोचन समारोह सम्पन्नउदयुपर 9 फरवरी। व्यंग्य लेखक को विचारों से क्रांन्तिकारी होना चाहिए तभी वह समाज एवं देश की विद्रूपताओं एवं विसंगतियों को साहित्य में अभिव्यक्त कर सकता है। आज अधिकतर व्यंग्य लेखक केवल राजनीति एवं राजनेता पर ही
 
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आज की शिक्षा एकलव्य का अँगूठा ही नहीं उसकी गर्दन भी माँगती है

हिम्मत सेठ प्रतिष्ठित पाक्षिक महावीर समता सन्देश के प्रधान सम्पादक हैं और अपनी जनपक्षधरता, बेबाकी तथा जुझारूपन के लिये जाने जाते हैं। दक्षिणी राजस्थान की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर बहस के केन्द्र में लाने में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हाल में
 
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