पसंद करें
0
नापसंद करें

बिखरे सितारे भाग ३ गर्दिशमे क़िस्मत.

(गतांक: बेवफाई?..मै बेतहाशा रोने लगी...इस तरह का इलज़ाम मेरी कल्पना के परे था..क्या से क्या हो गया था..जिस परिवार के ख़ातिर ,बच्चों की ख़ातिर मै हर तकलीफ़ सह गयी,उनमे से कोई मेरे पास न था..क्या करूँ? क्या करूँ? कहाँ  जाऊं? कौनसी ऐसी जगह थी इस
 
kshama
टैग: maa
पसंद करें
2
नापसंद करें

मातृत्व की विरासत

माँ, क्या कभी भी बड़ी हो पाती है अपने बच्चों की बढ़ती उम्र के साथ? क्यों उसके अन्दर आधुनिक जमाने की समझदारी नहीं आती? बड़े होकर बच्चे अपनी अपनी राह पकड़ कर चल देते हैं वे आगे चले जाते हैं अपनी जिन्दगी जीने माँ को पीछे छोड़कर। माँ जानती है इस बात को शुरु से
पसंद करें
1
नापसंद करें

Bikhare sitare:17 जा, उड़ जा रे पँछी..!

( गतांक : ओह! बिटिया को मै हर दिन का ब्यौरा लिखती..एक दिन उसने लिखा," अब बस भी करो माँ!"मैंने कहा, जीवन में यह पल बार बार आनेवाले नही.." जोभी है,बस यही इक  पल है..कर ले तू पूरी आरज़ू...." कल किसने देखा है? कलकी किसको खबर?और कितना सच था...आनेवाले कलमे
 
kshama
टैग: maa
पसंद करें
0
नापसंद करें

बिखरे सितारे १५:फिर एक इम्तिहान!

 (गतांक : तीन अखबारों में अब मेरे साप्ताहिक column छपने लगे..लेकिन ,लेकिन..बच्चों की याद..खासकर केतकी की, मुझे रुलाती रही...जीवन में उसे चैन नही हासिल हुआ...और चाहे गलती किसीकी हो...उसकी ज़िम्मेदार,एक माँ की तौरपे मै भी थी..आज माँ की मामता मुझे चैन
 
kshama
टैग: maa
पसंद करें
0
नापसंद करें

बिखरे सितारे 13: जुदाई

 (पूजा को हमेशा अपने पती से छुपके केतकी की ज़रूरतों को पूरा करना पड़ता. और बेचारी की ज़रूरतें ही कितनी-सी थी? कई बार तो उसे भूखे  पेट सो जाना पड़ता! छात्रावास का भोजनालय, केतकी जबतक लौटती, बंद हो जाता और आसपास खान पान की कोई सुविधा नहीं थी.केतकी
 
kshama
टैग: maa
पसंद करें
0
नापसंद करें

बिखरे सितारे: ८जाना कहाँ ना जानू..

.(पूर्व भाग:सुबह तक पूजा नही संभल पाई... केतकी कुछ बेहतर थी..पूजाने लाख कहा: " आप दोनों निकल जाएँ...मै कल परसों बिटिया को लेके ट्रेन से बंगलौर लौट जाउँगी..."लेकिन जनरीती की दुहाई देते हुए सब वापस लौट गए. पूजा और बिटिया से दोनों ने बात चीत करनी बंद कर
 
kshama
टैग: maa
पसंद करें
0
नापसंद करें

बिखरे सितारे:7 मझधार में

.(पूर्व  भाग :उस रात नींद में न जाने वो कितनी बार डरके रोते हुए उठी...लेकिन मासूम का प्यार देखो...सुबह अपने पितापे दृष्टी पड़तेही खिल उठी..पूजा की आँखों से   चुपचाप नीर बहा..हर गुज़रता दिन न जाने कितनी चुनौतियाँ भरा होता!सास अक्सर मिलने
 
kshama
टैग: maa
पसंद करें
1
नापसंद करें

बिखरे सितारे-६ तूफ़ान भरी राहें!

गौरव: " तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे सांप या बिच्छू ने डंख मार दिया हो...इसकी जान जा रही हो...चीटी के काटने से यह मर थोड़े ही जायेगी?"पूजा ने   उसे जल्दी जल्दी नहला डाला... बच्ची केवल ३० दिन की थी..आगे पूरी ज़िंदगी पडी थी...पूजाकी आँखों के आगे
 
kshama
टैग: maa
पसंद करें
0
नापसंद करें

बिखरे सितारे! ५: नन्ही कली...

पूर्व भाग: पूजाका दोबारा गर्भ पात हो गया. माँ तथा बहन तब उसके घर पहुँचे थे. पूजाका जीवन, उसका दुःख दर्द उनकी आँखों के आगे एक खुली किताब बन गया. अब आगे पढ़ें.कुछ दिन बाद माँ और छोटी बहन तो चले गए,लेकिन दिलमे एक गहरा सदमा लेकर. माँ भी समझ नही पा रही थी,की,
 
kshama
टैग: maa
पसंद करें
0
नापसंद करें

adhyaay 2..chhoot gayaa wo angnaa...

पिछली कड़ी: मेरा..मतलब पूजा तमन्ना का ब्याह गौरव के साथ हो गया....बेलगाम के छोटा से गाँव से निकाल मै लखनऊ पहुँच गयी...अभी  गुह प्रवेश  ही  हो  रहा  था ,की , कानों  में    अलफ़ाज़  पड़े ," ये  गौरव 
 
kshama
टैग: maa
पसंद करें
0
नापसंद करें

माँ, बुनती है सपने

माँ बुनती है सपनें किसी भी वक्‍त दिन हो या रात बस एक जरा सी झपकी लगी हो या यूँ ही आँख बंद कर लेटी हो माँ की आँखें मुझे कभी भट्टी सी लगती हैं जहाँ सपनें फुदकते है लगातार फुटानों की तरह या कभी सूने झरने सी जहाँ आंसुओं के बादल पर सपने छाये रहते हैं सतरं
 
नियंत्रक । Admin
टैग: maa
पसंद करें
0
नापसंद करें