जैसा जीवन है..
शायद अपने यहां बहुत सारी कला जीने का मतलब बहुत सारे दु:ख जीने की तैयारी को न्यौता देना होता हो? जैसे मोबाइल फ़ोन के टावरों को सिर पर सजाते रहने की सुखनसाज कलावंती में रेडियेशन के हौज में बूड़ जाने की होशियारी बनती जाती हो.. पता नहीं किस तरह का शासन है
Jun 07 2010 05:13 AM



Shuffle








