यादों के पल
जीवन की रेल पेल मेंहर संघर्ष को झेलतेहर सुख दुःख को सहतेकभी मैंने चाही नही इनसे मुक्तिपर कभी बैठे बैठे यूं ही अचानकजब भी याद आई तुम्हारीतब यह मन आज भीभीगने सा लगता हैचटकने लगते हैं तन मन मेंजैसे मोंगारे के फूलऔर जैसेसर्दी से कांपते बदन मेंतेरी याद का
May 24 2010 12:36 PM



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