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आज ''काव्योत्सव'' में छपने वाले कवि देवेन्द्र कुमार जी

आज ''काव्योत्सव'' में छपने वाले कवि महोदय हैं देवेन्द्र कुमार जी जो फिलहाल पेशे से पत्रकार हैं और बर्तमान में लखनऊ में कार्यरत हैं उनका पता - L DA कालोनी, कानपुर रोड, लखनऊ, फ़ोन – 9044824636goswami.deven@gmail.कॉम पर संपर्क किया जा सकता है.बेटीमाँ मैं भी
 
माणिक
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इन्दुपुरी जी गोश्वामी आज ''काव्योत्सव'' में

इन्दुपुरी जी गोश्वामी आज  के हमारे रचाकार  है जिनकी कविता ''काव्योत्सव'' में छप रही है.वे एक शिक्षिका हैं साथ ही समाजसेवा के बहुत काम करने में रुचिशील नज़र आती हैं.puri.indu4@gmail.com"तिनके"तिनकों को क्या चाहिए ? कुछ खास धरती नहीं कुछ खास
 
माणिक
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आज ''काव्योत्सव'' में कवि और रचनाकार साथी अरुण चंद्र राय

आज ''काव्योत्सव '' में अलग ही ढंग से कविता के ज़रिये समाज के ख़ास पहलुओं पर ध्यान दिलाने वाले कवि और रचनाकार साथी अरुण चंद्र राय एक परिचय एक कॉपीराइटर के तौर पर कैरियर शुरू करने वाले आपने देश  के विज्ञापन एजेंसियों और बड़े ब्रांडों के लिए कार्य
 
अपनी माटी सम्पादक
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आज ''काव्योत्सव'' में किरण जी राजपुरोहित ''नितिला''

आज ''काव्योत्सव'' में हम आपाकी मुलाक़ात एक कविता के ज़रित्ये करा रहा हैं किरण जी राजपुरोहित ''नितिला''से जो वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ,तखतगढ 306912,जिला पाली ‘राजस्थान’ में रहती हैं और उनसे इनके सपर्क सूत्र 02933220502,9829202502,  बात
 
अपनी माटी सम्पादक
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''काव्योत्सव'' में आज डॉ.अनिल चड्डा की रचना

Share अपनी माटी और आप सभी की तरफ से सुनहरे भविष्य की कामना के साथ ''काव्योत्सव'' में आज डॉ.अनिल चड्डा की रचना और  रचनाकार प्रस्तुत हैं.स्वागत करिएगा.आपके अनमोल सुझाव ,विचार भी बताइएगा डॉ.अनिल चड्डा http://anilchadah.blogspot.comनिदेशक,दूरसंचार
 
माणिक
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''काव्योत्सव'' में आज शील निगम की रचना

Share अपनी माटी और आप सभी की तरफ से सुनहरे भविष्य की कामना के साथ ''काव्योत्सव'' में आज शील निगम की रचना और  रचनाकार प्रस्तुत हैं.स्वागत करिएगा.आपके अनमोल सुझाव ,विचार भी बताइएगा शील निगम sheelnigam@yahoo.comभीगे मौसम की सुगंधमयी सदा,श्रावणी
 
माणिक
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''काव्योत्सव'' में आज आचार्य संजीव 'सलिल'

आचार्य संजीव 'सलिल', संपादक दिव्य नर्मदाई मेल; सलिल.संजीव@जीमेल.कॉमsalil.sanjiv@gmail.com अम्ब विमल मति देहे हंस वाहिनी! ज्ञानदायिनी!!अम्ब विमल मति दे.....नन्दन कानन हो यह धरती।पाप-ताप जीवन का हरती।हरियाली विकसे.....बहे नीर अमृत सा पावन।मलयज शीतल शुद्ध
 
माणिक