मुझे जीने का हक है!
न जाने क्यों बगावत करतन कर खड़ी हो गईवर्जनाओं और प्रतिबंधों कीजंजीरों को तोड़करनए स्वरूप मेंजंग का ऐलान कर.माँ लगी समझानेवे बड़े हैं,पिता हैं,भाई हैं ,उन्हें हक हैकि तुझे अपने अनुसारजीवन जीने देने का।नहीं, नहीं, नहीं..........बचपन से प्रतिबंधों कीजंजीरों
Feb 23 2010 02:47 PM



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