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खामोश तूफान-हिन्दी शायरी (khamosh toofan-hindi shayari)

दीवार के उस तरफ वह आग की तरह उफन रहे हैं यह सोचकर कि इस पार पहुंचते ही तिनके को जला डालेंगे। अंदाज नहीं उनको इस बात का कि यहां भी कोई खामोश तूफान सांस ले रहा है यह ख्याल करते हुए कि हवाओं का रुख पलटा है कई बार इस बार आग को भी [...]
 
दीपक भारतदीप
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चाणक्य दर्शन-पैसा जोड़ने से ही शांति नहीं मिलती

धनेषु जीवतिव्येषु स्त्रीषु चाहारकर्मसु। अतृप्तः प्राणिनः सर्वे याता यास्यन्ति यान्ति च।। हिन्दी में भावार्थ- धन और भोजन के सेवन तथा स्त्री के विषयों में लिप्त रहकर भी अनेक मनुष्य अतृप्त रह गए, रह जाते हैं और रह जायेंगे। किं तया क्रियते लक्ष्म्या या
 
दीपक भारतदीप
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चाणक्य नीति दर्शन-खोखले बांस के पेड़ पर हवा प्रभाव नहीं डाल सकती

अंतःसारविहनानामुपदेशो न जायते। मलयाचलसंसर्गान् न वेणुश्चंदनायते।। नीति विशारद चाणक्य जी का मानना है कि मलयाचल पर्वत से प्रवाहित वायु देह के स्पर्श से ही सामान्य पेड़ भी चंदन जैसे सुगंधित हो जाते हैं। एक मात्र बांस का पेड़ ही खोखला होता है जिस पर कोई हवा
 
दीपक भारतदीप
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चाणक्य नीति-उत्तम पुरुषों को गलत बताने वाले कष्ट उठाते हैं

दारिद्रयनाशनं दानं शीलं दुर्गतिनाशनम्। अज्ञाननाशिनी प्रज्ञा भावना भयनाशिनी।। हिंदी में भावार्थ-दान से दरिद्रता, शील भाव से दुर्भाग्य तथा निष्ठा से भय का नाश होता है। अन्यथा वेदपाण्डितयं शास्त्रमाचारमन्यतथा। अन्यथा कुवचः शान्तं लोकाः क्लिश्चन्ति
 
दीपक भारतदीप
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मनु स्मृति-अध्ययन में सुस्ती नहीं करें (manu smriti-shiksha aur susti)

अध्येयष्यमाणं तु गुरुर्नित्यकालमतन्द्रितः। ‘अधीष्व भो! इति ब्रुयाद्विरामोऽस्त्विति चारमेत्।। हिंदी में भावार्थ-शिष्य को पढ़ाने के विषय में गुरु को कभी भी आलस नहीं बरतना चाहिये। इसके अलावा बेमन से भी अध्यापन का कार्य करना उचित नहीं है। अध्यापन प्रारंभ करने
 
दीपक भारतदीप
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रहीम क दोहे- दिल लगाकर कम करें कामयाबी तय करें (rahim ke dohe)

रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय कविवर रहीम के मतानुसार मन लगाकर कोई काम कर देखें तो कैसे सफलता मिलती है। अगर अच्छी नीयत से प्रयास किया जाये तो नर क्या नारायण को भी अपने बस में किया जा सकता है। वर्तमान संदर्भ में
 
दीपक भारतदीप
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मनुस्मृति-भावावेश में गधे जैसे शब्द नहीं बोलें

न नृत्येन्नैव गायेन वादित्राणि वादयेत्। नास्फीट च क्ष्वेडेन्न च रक्तो विरोधयेत्।। हिंदी में भावार्थ-मनुमहाराज कहते हैं कि नाचना गाना, वाद्य यंत्र बजाना ताल ठोंकना, दांत पीसकर बोलना ठीक नहीं और भावावेश में आकर गधे जैसा शब्द नहीं बोलना चाहिये। न कुर्वीत
 
दीपक भारतदीप