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तरक्की और कामयाबी-हिन्दी शायरी

अपनी मदद खुद कर सको, उतना ही आगे जाना। तरक्की और कामयाबी के ख्वाब में यूं न खो जाना।। बिकते हैं सपने बाज़ार में, मु्फ्त का खेल दिखाकर, तरक्की के रास्ते चल, उधार के जाल में न फंस जाना ।। ———– मोहब्बत शादी के अंजाम तक आशिक और माशुका
 
दीपक भारतदीप
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किसके चिल्लाने की बारी है-हिन्दी व्यंग्य कविता

भ्रष्टाचार, अत्याचार और व्याभिचार को भी जाति, भाषा और धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश जारी है, अक्लमंद दिखाते हैं बहादुरी अपने अपने हिस्से की शिकायतें उठाने में शब्द खर्च करते दूसरे की कमियां गिनाने में हर हादसे पर देखते हैं बस यही कि किसके चिल्लाने की
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विज्ञापन तय करते हैं कहानी-आलेख

आखिर यह कोई सुनियोजित एजेंडा है या अनजाने में बन गयी सोच कि भारतीय संस्कृति, संस्कारों और धर्मों पर टीवी धारावाहिकों और फिल्मों में ऐसी कहानियां दिखाईं जातीं है जिससे उसका नकारात्मक पक्ष अधिक प्रकट होता है। फिल्मों और धारावाहिकों में अनेक बार लंबे समय तक
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भूख और बन्दूक-हिंदी लेख (Hunger and gun – Hindi article)

भूखे पेट भजन नहीं होते-यह सच है पर साथ ही यह भी एक तथ्य है कि भूखे पेट गोलियां या तलवार नहीं चलती। देश में कुछ स्थानों-खासतौर से पूर्व क्षेत्र-में व्याप्त हिंसा में अपनी वैचारिक जमीन तलाश रहे कुछ विकासवादी देश के बुद्धिजीवियों को ललकार रहे हैं कि ‘तुम उस
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सौदागरों के बुत-व्यंग्य शायरी

अख़बारों में छपे बड़े बड़े शख्सों के बयान अब आखों से आगे बढ़कर दिल की गहराई में नहीं जाते. ढेर सारा कागज़ का भंडार है चारों तरफ उसे खाने के लिए अक्षर पक्षी चाहिए स्याही की बह रही हैं धारा, मिलना जरूरी है उसको भी किनारा, बाज़ार के सौदागर केवल शय ही नहीं