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डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल का उदयपुर में ‘सृजन साक्षात्कार’
मनुष्य ताड़ पत्र से छापाखाने तक आया है। सब कुछ वैसा ही नहीं है जैसा हजार या पांच हजार बरस पहले था फिर मुद्रित शब्द से आगे डिजिटाइजेशन में क्यों हो? ‘संचार के नये माध्यम और हिन्दी’ विषय पर व्याख्यान में सुपरिचित समालोचक/ब्लॉगर डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने
Apr 12 2010 09:54 AM



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