पसंद करें
7
नापसंद करें

बरसाती ख़याल कुछ यू भी

मेघा आज फिर टुटके बरसे तुम मीत से माटी से ‘महक’ ऊठी , इश्क में सराबोर निकली | ================================ ये क्या हुआ ‘महक’, दीवानगी की सारी हदे पार कर ली सावन में बरसी हर बूँद तुने,अपने अंजुरी में भर ली | =================
 
mehhekk