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कांग्रेस बोली- ‘नई बात नहीं महंगाई तो हम साथ लाए थे’

यह अपनी मनगढ़ंत बात नहीं। खुद कांग्रेस ने कहीं है यह बात। वह भी कोई छोटे-मोटे नेता ने नहीं। अलबत्ता सोनिया की बगल में खड़े होकर कही गई। वह भी ताल ठोककर। कहां कही, किसने कही, कब कही। उस सबका खुलासा अपन बाद में करेंगे। पहले बात संसद ठप्प होने की। पहले ही दिन
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अमीर हो गए हैं लोग, मंहगाई का असर नहीं

अपन को भी पार्लियामेंट कवर करते दो दशक होने को। ऐसा ढुलमुल अभिभाषण किसी सरकार का नहीं सुना। अभिभाषण पढ़ते भले ही राष्ट्रपति हों। तैयार करती है सरकार। मंजूरी देती है केबिनेट। सो मनमोहन सरकार का अभिभाषण बेअसर सा रहा। ढुलमुल सा रहा। जैसे बचाव की मुद्रा में
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सत्ता चिड़िया की आंख बीजेपी ने तान लिया बाण

शुक्रवार बीजेपी अधिवेशन का आखिरी दिन था। आंदोलन की रूपरेखा सामने आई। दूसरे दिन राम मंदिर की तान अलापी गई। तो तीसरे दिन गंगा मैया और मुस्लिम आरक्षण छाया। तीनों मुद्दे हिंदुत्व के। यों नितिन गड़करी कट्टर हिंदूवादी नहीं। पर संघ की लाईन तो लेनी पड़ेगी। यों बात
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ब्यूरोक्रेसी की अकल ठिकाने लगाई तीन दस जनपथियों ने

सरदार पटेल के समय में जरूर ऐसा होता था। जब कोई मंत्री पीएम से उलझने की हिम्मत करे। इंदिरा के जमाने से वैसी हिम्मत फिर किसी ने नहीं की। जिसने भी हिम्मत की। वह केबिनेट से बाहर हो गया। वीपी सिंह का राजीव से टकराव पुरानी बात नहीं। अरुण नेहरू, अरुण सिंह और
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मुंबई के बाद हो गया पुणे, बात से फिर भी नहीं परहेज

बारह फरवरी को अपन ने लिखा था- ‘अमेरिकी दबाव में बात, पर आतंकियों का घर है पाक।’ इसी में अपन ने खुलासा किया था- ‘कुरैशी ने होलबु्रक को भारत में मुंबई नहीं दोहराने की गारंटी नहीं दी।’ और तेरह फरवरी को पुणे में मुंबई दोहराया गया। कौन
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तेलंगाना में आग भड़की तो कबूतर ने आंखें मूंद ली

तेलंगाना पर आयोग बनाकर आग बुझाई थी। आयोग की शर्तों ने आग फिर भड़का दी। नौ दिसंबर कांग्रेस के जी का जंजाल बन गया। उस दिन सोनिया का जन्म दिन था। तेलंगाना के कांग्रेसी नेता बधाई देने पहुंचे। तो तेलंगाना का रिटर्न गिफ्ट मांग लिया। सोनिया ने उसी दिन कोर कमेटी
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पवार की हरकतों पर कांग्रेस की तिरछी नजर

देवीसिंह शेखावत के खिलाफ कोर्ट फैसले से कांग्रेस में हड़कंप। चौबीस अकबर रोड और दस जनपथ ने फौरी पड़ताल की। अभिषेक मनु सिंघवी को खबर नहीं थी। ब्रीफिंग खत्म हुई। तो उनने सवाल पूछने वाले से डिटेल पूछी। तभी एक मराठी मानुष खबरची ने कहा- ‘जमीन घोटाले का
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तो कांग्रेस का आपरेशन आजमगढ़ शुरू होगा अब

तो दिग्गी राजा ने कांग्रेसी प्रवक्ताओं की हवा खिसका दी। अपन भी हैरान थे। दस जनपथ के इशारे बिना तो आजमगढ़ नहीं गए होंगे दिग्गीराजा। वही सच निकला। दिग्गी राजा ने सोनिया को आजमगढ़ दौरे की रपट दी। तो कांग्रेसी प्रवक्ताओं की घिग्गी बंध गई। अभिषेक मनु सिंघवी,
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पवार की ठाकरे वंदना से राहुल ब्रिगेड भड़की

राहुल बाबा ने उस दिन गलती से बिहार की जगह गुजरात कह दिया। तो बवाल खड़ा हो गया। बवाल से नरेन्द्र मोदी गदगद हुए। अब वरुण बाबा ने मंहगाई पर दोधारी तलवार चलाई। तो फिर विवादों में फंस गए। उनने कहा – ‘केन्द्र में रावण, तो प्रदेश में सूर्पनखा।’
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कांग्रेस वर्किंग कमेटी पर दिखी राहुल की छाया

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग अर्से बाद हुई। महंगाई पर पिछली मीटिंग पंद्रह अगस्त के बाद उन्नीस अगस्त को हुई थी। अब छब्बीस जनवरी के बाद पांच फरवरी को। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के बीच महंगाई और बढ़ गई। वर्किंग कमेटी के दो मेंबर घट गए। शिवराज पाटिल
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बाल ठाकरे अब बिहार में बीजेपी की लुटिया डुबोएंगे

बीजेपी 2004 का चुनाव हारी। तो प्रमोद महाजन निशाने पर थे। हर ऐरा-गैरा कहता था- ‘प्रमोद के फाइव स्टार कल्चर ने पार्टी का बंटाधार किया।’ अब समाजवादी अपने अमर सिंह पर भी वही आरोप लगा रहे। समाजवादी पार्टी से निकाले गए। तो अमर सिंह अब बेपेंदे के
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महंगाई के मोल-तोल में सरकार एक कदम आगे, दो कदम पीछे

महंगाई पर केबिनेट कमेटी हुई। तो शरद पवार ने दावा ठोका था- ‘अब महंगाई घटनी शुरू हो जाएगी। कम से कम चीनी के दाम जल्द घटेंगे।’ प्रेस कांफ्रेंस का ऐलान छपा। अखबारों की स्याही सूखी नहीं थी। खुद पवार ने दूध की किल्लत का रोना रो दिया। बात पवार की चल
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कंगारूओं की करतूतों से भरा सब्र का प्याला

आस्ट्रेलिया में हमले थम नहीं रहे। गुरुवार को फिर ताजा खबर आ गई। एक ही दिन में तीन हमले। तीन टैक्सी ड्राईवर निशाने पर थे। चौथा पिज्जा डिलिवरी करता था। अपन खुद ही हमलों की छानबीन कर लें। पिछले एक साल में जितने हमले हुए। सभी छोटे-मोटे करिंदों पर थे। या फिर
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कांग्रेस पर हावी होने लगे यूपीए सरकार के मंत्री

यों तो पहले कांग्रेस की सरकारें रही हों। या बीजेपी की। पार्टियों का वजूद खत्म सा हो जाता रहा। इंदिरा-राजीव-नरसिंह राव पीएम थे। तो कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भी थे। सो कांग्रेस चौबीस अकबर रोड से नहीं। पीएम के घर से ही चलती थी। सरकार वाजपेयी की बनी। तो
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पवार के मुंहतोड़ जवाब से कांग्रेस हुई लाजवाब

गणतंत्र दिवस की बधाई। खुशी के मौके पर महंगाई का रोना ठीक नहीं। सो मनमोहन ने मुख्यमंत्रियों की मीटिंग टाल दी। सोनिया ने सीडब्ल्यूसी की मीटिंग बुलाई। पर गणतंत्र दिवस के बाद। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली म्यूंग बाक दिल्ली पहुंच गए। वह आज गणतंत्र दिवस के
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मंहगाई का ठीकरा फोड़ा तो पवार भी मुंहतोड़ जवाब देंगे

बात मंहगाई की। कांग्रेस मीडिया के सवालों से परेशान। ऊपर से पवार के चीनी-दूध की कीमतें बढ़ाने वाले बयान। यों भी कांग्रेस को मंहगाई पर कोई जवाब नहीं सूझ रहा। पीएम केबिनेट कमेटी की मीटिंग कर चुके। केबिनेट में चर्चा हो चुकी। चीनी की कीमतें घटाने के कुछ कदम भी
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चिदंबरम फार्मूले में एनएसए के लिए कोई जगह नहीं होगी

नारायणन की जगह फिलहाल शिवशंकर मेनन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार। चिदंबरम के दिमाग में कुछ और। इसीलिए अपन ने फिलहाल लिखा। इसका खुलासा अपन बाद में करेंगे। पहले बात मेनन की। यूपीए सरकार के साढ़े पांच साल में वह तीसरे एनएसए। जेएन दीक्षित, नारायणन पहले रह चुके।
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चीनी के बाद अब पवार ने दूध मंहगा करने की ठानी

दूध का वादा कारोबार कैसे होगा। दूध तो आज की बात आज। पर नहीं, दूध का वादा कारोबार भी होगा। दूध से बनी चीजों की मांग आज दूध से ज्यादा। जो बच्चे दूध नहीं पीते। उनको भी दूध का बना ‘चीज’ पसंद। इटली के ‘पीजा’ की डिमांड अब बड़े शहरों में
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युवा स्टेट मिनिस्टर रोए पीएम के सामने

अपन ने कल बताया था- ‘मारे-मारे फिर रहे हैं युवा स्टेट मिनिस्टर।’ उसमें अपन ने पीएम की बुलाई मीटिंग का खुलासा किया। तो मंगलवार को तय वक्त पर हो गई मीटिंग। मनमोहन खुलकर सुनने के मूड में थे। सो दो घंटे का वक्त तय हुआ। पर मीटिंग खत्म हो गई एक
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मारे-मारे फिर रहे हैं युवा स्टेट मिनिस्टर

गवर्नरों की तैनाती हो गई। मोहसिना किदवई और उर्मिलाबेन बनती-बनती रह गई। खबर उड़ाई- मोहसिना ने आखिर वक्त पर इनकार कर दिया। अपन यह मानने को तैयार नहीं। उनकी जगह पर एमओएच फारुकी का नाम अचानक नहीं आया। तीन दिन पहले छप चुका था। उर्मिलाबेन के नाम की गफलत तो
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नया फार्मूला लाएगी सरकार कम खाओ, महंगाई घटाओ

कांग्रेस ने महंगाई पर कोर कमेटी नहीं बुलाई। पर अब जब गवर्नरों की तैनाती की बात चली। तो कोर कमेटी में चर्चा हुई। पीएम के घर हुई मीटिंग में गवर्नरों पर चर्चा संविधान का कितना मजाक। अत्यंत गोपनीय होना चाहिए यह मामला। तब तक किसी को केबिनेट के फैसले की भनक तक
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आडवाणी की कामना ‘बीजेपी में हो संक्रांति’

आठ नवंबर को अपन दिल्ली में नहीं थे। उस दिन अपन ‘विराट नगर’ के ‘बाल आश्रम’ में थे। सो लालकृष्ण आडवाणी को जन्मदिन पर बधाई देने नहीं पहुंच सके। पर अपन उस दिन पिता पर बनी प्रतिभा की डॉक्यूमेंट्री से महरूम रह गए। गुरुवार को संक्रांति
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रामगोपाल के ‘शोलों’ ने ‘आग’ लगा दी सपा में

दिल्ली के एक अखबार ने ‘थ्री इडिएट’ को नए रंग में पेश किया। उन कुर्सियों पर रामगोपाल, मुलायम और अमर सिंह को बिठा दिया। अमर सिंह सिंगापुर से लौटेंगे। तो जरूर अखबार पर भड़केंगे। पर मंगलवार को तो उनकी रामगोपाल से तू-तू, मैं-मैं तेज हो गई। कड़कड़ाती
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गली-मोहल्लों में भी आवारा ही देते हैं ऐसी गालियां

कमर तोड़ती महंगाई। जान निकालती सर्दी। इन दोनों के बीच हरदन हल्ली डोडेगौडा देवगौड़ा का बयान। जिसने कंपकंपाती सर्दी में भी गर्मी ला दी। पहले बात महंगाईकी। अपने कृषि मंत्री शरद पवार का भी जवाब नहीं। कभी कहते हैं- चीनी और महंगी होगी। कभी कहते हैं- मैं कोई
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रोसैया के नाक में दम कर दिया कांग्रेसियों ने

आंध्र में सोनिया के जन्मदिन पर लगी आग बुझी नहीं। वाईएसआर चंद्रशेखर समर्थकों का नया तांडव शुरू हो गया। यों खबर नई नहीं। पर आंध्र प्रदेश के चैनल ने नई बनाकर पेश कर दी। खबर दी- ‘वाईएसआर की हैलीकाप्टर दुर्घटना एक साजिश थी। साजिश के पीछे काम कर रहा था
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मोदी के साथ तारीफ जरा हाईकोर्ट की भी हो जाए

बिग बी ने नरेंद्र मोदी की तारीफ के पुल बांधे। तो कांग्रेस खफा हुई। कांग्रेस तो यों भी बिग बी से खफा। वजह अपन नहीं जानते। कोई राज की बात है गहरी। वरना इटली से आई सोनिया का पहला घर गुलमोहर पार्क ही था। गुलमोहर पार्क में अमिताभ बच्चन के घर ठहरी थी सोनिया।
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चिदंबरम बोले- सो जाओ नहीं तो भालू आ जाएगा

तो अपन बात कल से ही शुरू करें। अपन ने लिखा था- ‘कांग्रेस तो खुद बंटी हुई दिखेगी तेलंगाना मीटिंग में।’ आखिर कांग्रेस ने के.एस. राव और उत्तमकुमार को भेजा था। मकसद था- दोनों अपनी-अपनी बात कह दें। पर जब मीटिंग से पहले ही जगहंसाई होने लगी। तो
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कांग्रेस तो खुद बंटी हुई दिखेगी तेलंगाना मीटिंग में

सरकार का बेहतरीन फैसला साठ साल बाद आया। अब सजायाफ्ता अफसरों के मैडल छीने जाएंगे। पहला मैडल एसपीएस राठौर का छीना गया। नई पॉलिसी का सेहरा भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के सिर बंधेगा। उनने ही मैडल छीनने की सिफारिश भेजी थी। जिस पर होम मिनिस्ट्री ने पॉलिसी बना दी।
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सुप्रीम कोर्ट को बचाव में ढाल बनाया राठौर ने

शशि थरूर चुप हो गए। एसएम कृष्णा पहली बार कारगर मंत्री के रूप में दिखे। थरूर को बुलाकर साफ-साफ कहा- ‘सरकारी नीतियां टि्वटर पर डिसकस नहीं हो सकती। आपने मंत्री पद की शपथ ली है। आप किसी एक मंत्रालय के खिलाफ नहीं बोल सकते।’ मतलब साफ था- टि्वटर और
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सोनिया के गलत कदम से ब्रांड हैदराबाद का कचरा

अपन आंध्र की बिगड़ी हालत का खुलासा करें। उससे पहले चर्चा कुछ राजनीतिक बयानों की। मंगलवार को राजनीतिक गलियारों में इन बयानों पर खूब चटकारे सुने। पहला मामला शशि थरूर के टि्वटर का। उनने वीजा नियमों को सख्त करने की खिल्ली उड़ाई थी। जिस पर विदेशमंत्री एसएम
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सुख रामों-शिबू सोरेनों वाली पार्टी विद डिफरेंस

अपन ने मनमोहन सिंह का भाषण पढ़ा। देवकांत बरुआ की याद आ गई। इमरजेंसी के दिन थे। चापलूसों का जमाना था। खुद्दार जेल में थे, चापलूस बाहर। इंदिरा गांधी ने बरुआ को कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया। तो उनने चापलूसी की सारी हदें पार कर दी थी। जब कहा- ‘इंदिरा इज
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वाईएसआर की मौत के बाद आंध्र नित नए संकट में

चौदह साल की रुचिका से छेड़छाड़ पर उन्नीस साल बाद उबल पड़ा है देश। उन्नीस साल बाद पुलिस इंस्पेक्टर शंभू प्रताप सिंह राठौर को छह महीने की सजा मिली। इस बीच वह डीजीपी बनकर रिटायर भी हो चुका। ब्यूरोक्रेसी और पालीटिशियन बचाते रहे राठौर को। राठौर ने पहले रुचिका से
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सत्ता नहीं, समाजसेवा होगा गडक़री की बीजेपी का लक्ष्य

अपन नितिन गड़करी से पहले मिले तो थे। पर ऐसे कभी नहीं। एक घंटे की प्रेस कांफ्रेंस। समां बांधकर रख दिया। उन लोगों को बहुत निराशा हुई। जो राष्ट्रीय राजनीति का अनाड़ी समझ बैठे थे। पहली प्रेस कांफ्रेंस में ही मनोबल तोड़ने के इरादे से पहुंचे थे कई धुंरधर। पर
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जवाब नहीं बना तो स्पिन डाक्टरी पर उतरे जयराम

अपन ने कल लिखा था- कटघरे में होंगे जयराम। सो जेटली और येचुरी ने कटघरे में खड़ा किया। दोनों पूरी तैयारी करके आए थे। येचुरी तो खुद कोपेनहेगन में थे। सो पूरे मसाले के साथ तैयार थे। मूल रूप से वकील जेटली की तैयारी का तो कहना ही क्या। अपन को पता था येचुरी पूरे
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कल तो बच गए, आज कटघरे में होंगे जयराम

तेलंगाना के डर से लोकसभा तो सिमट गई। पिछले शुक्रवार को ही सिमट गई। पर राज्यसभा अभी भी जारी। यों सत्रावसान 21 दिसंबर को होना तय था। इक्कीस की तारीख तय करने की वजह थी। वजह थी- कोपेनहेगन में हुए समझौते पर संसद में बयान देना। यह विपक्ष की मांग थी- सत्रावसान
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न राजनीति से संन्यास, न रथ से उतरेंगे आडवाणी

सरकार 21 तक संसद नहीं चला पाई। तो बीजेपी ने भी सत्रावसान के साथ ही नेता पद का फैसला निपटा लिया। बीजेपी शुक्रवार को अचानक पारदर्शी हो गई। पार्लियामेंट्री पार्टी की मीटिंग मीडिया के लिए खोल दी गई। मीडिया के सामने पार्लियामेंट्री पार्टी के संविधान में
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अगला हफ्ता बीजेपी में उथल-पुथल का

सुषमा स्वराज को रोकने के लिए ब्राह्मणवाद का फच्चर। पर अपन को कतई नहीं लगता यह फच्चर सुषमा को रोक पाएगा। आडवाणी ने सुषमा को अपनी कुर्सी देना तय कर लिया। राजनाथ सिंह की निगाह इस कुर्सी पर होगी। पर इस मामले में संघ का दखल नहीं चलेगा। संघ में जातिवाद से पद
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पच्चीस साल बाद खुलकर हुई चौरासी पर बहस

पहले ज्ञानी जैल सिंह ने राष्ट्रपति होते हुए माफी मांगी। फिर सोनिया गांधी ने भी माफी मांगी। पर जख्म इतनी जल्दी नहीं भरा करते। कई बार तो भरते भी नहीं। सिखों के कत्ल-ए-आम के जख्म माफियों से नहीं भरेंगे। कांग्रेस तो बहस से भी आंख चुराती रही। आयोगों ने
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कांग्रेस अब तटीय आंध्र रायलसीमा हिंसा से डरी

कांग्रेस ने मक्खियों के छत्ते में हाथ डाल लिया। तेलंगाना का ऐलान मक्खियों का छत्ता साबित हुआ। बोडोलैंड, गोरखालैंड, विदर्भ, हरितप्रदेश, बुंदेलखंड की मांग उठ गई। गोरखों ने भी चंद्रशेखर राव की तरह आमरण अनशन का ऐलान कर दिया। गोरखों को इंसाफ का वादा दिलाकर
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चंद्रबाबू -जगनरेड्डी की हवा निकालेगा तेलंगाना

लिब्रहान रपट पर चौथे दिन की बहस निपट गई। राज्यसभा में भी वही रुख रहा। बीजेपी के स्टार स्पीकर थे वेंकैया नायडू। कांग्रेस के स्टार स्पीकर थे कपिल सिब्बल। वेंकैया बोले- ‘रपट को बंगाल की खाड़ी में फेंक दो।’ कपिल बोले- ‘बीजेपी देश से माफी