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जुबां का रिश्ता-हिन्दी शायरी

आखों से अब अश्क नहीं बहते क्योंकि दर्द का दरिया सूख गया है, जहां दिल लगाया दिल्लगी समझ जमाने ने मुंह फेरा अब बयां नहीं करते किसी से अपने हाल अपनी ही हकीकतों से हमारी जुबां का रिश्ता टूट गया है। ———- उनकी प्यार भरी निगाहें देखकर हमने
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किसके चिल्लाने की बारी है-हिन्दी व्यंग्य कविता

भ्रष्टाचार, अत्याचार और व्याभिचार को भी जाति, भाषा और धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश जारी है, अक्लमंद दिखाते हैं बहादुरी अपने अपने हिस्से की शिकायतें उठाने में शब्द खर्च करते दूसरे की कमियां गिनाने में हर हादसे पर देखते हैं बस यही कि किसके चिल्लाने की
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विज्ञापन तय करते हैं कहानी-आलेख

आखिर यह कोई सुनियोजित एजेंडा है या अनजाने में बन गयी सोच कि भारतीय संस्कृति, संस्कारों और धर्मों पर टीवी धारावाहिकों और फिल्मों में ऐसी कहानियां दिखाईं जातीं है जिससे उसका नकारात्मक पक्ष अधिक प्रकट होता है। फिल्मों और धारावाहिकों में अनेक बार लंबे समय तक
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एकता की कोशिश-हिन्दी शायरी

भीड़ में एकता की कोशिश पर हंसी आ ही जाती है। जहां पहले ही चीख रहे हैं लोग अपनी करनी का बखान करते हुए बंद किये हैं कान, आंखों  से ढूंढ रहे अपने लिये सम्मान, वहां शांति के नारे की आवाज शोर करती नजर आती है। ——- वफादारी  खामोश जज़्बात के
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शरीर और मन से विकार निकालने का सबसे अच्छा उपाय है योग साधना (yogsadhna-hindi lekh)

अक्सर लोग योग साधना को केवल योगासन तक ही सीमित मानकर उसका विचार करते हैं। जबकि इसके आठ अंग हैं। योगांगानुष्ठानादशुद्धिये ज्ञानदीप्तिराविवेकख्यातेः।। हिंदी में भावार्थ-योग के आठ अंग-यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। इसका आशय यही