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संत कबीर दास के दोहे-प्रेम की फसल किसी खेत में नहीं होती (sant kabir das ke dohe-khet men prem nahin ugta)
यह तो घर है प्रेम का, ऊंचा अधिक इकंतशीश काटि पग तर धरै, तब पैठ कोई संतसंत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि प्रेम का घर तो ऊंचे स्थान और एकांत में स्थित होता है जब कोई इसमें त्याग की भावना रखता है तभी वहां तक कोई पहुंच सकता है। ऐसा तो कोई संत ही हो सकता
May 20 2010 09:06 AM



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