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आस्था बिचारी-हिन्दी शायरियां (astha bichari-hindi shayriyan)

जोगिया रंग ओढ़कर जोगी नहीं हो जाते,नीयत का साफ होना जरूरी है,सच्चे संत कभी भोगी नहीं हो पाते।हाथ में किताब है धर्म की,नहीं जानते जीवन रहस्य के मर्म की,धरती की गर्म हवा से विचलित हो जाते,दौलत की ख्वाहिश वाले कभी निरोगी नहीं हो पाते।भीड़ जुटा ली अपने चाहने
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अमन और तरक्की गेंहूं की तरह पिसते हैं-हिन्दी शायरी (aman aur tarakki piste hain-hindi shayari)

खिली हुई हैं उनकी बाछें,बिछ गयी हैं फिर जमीन पर आज कुछ लाशें,क्योंकि कातिलों से उनके जज़्बातों के रिश्ते हैं।अपने ख्यालों का ओर छोर पता नहीं,हमख्याल जहां देखते, कोरस गाने लगते हैं वहीं,अपनी अक्ल किराये पर चलाते हैं,पर आजाद खुद को बताते हैं,खूनखराबे और
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खौफ के साये में जीने के आदी लोग-हिन्दी शायरी (kauf sa saaye men log-hindi shayari)

तारीफों के पुल अब उनके लिये बांधे जाते हैं,जिन्होंने दौलत का ताज़ पहन लिया है।नहीं देखता कोई उनकी तरफजिन्होंने ज़माने को संवारने के लियेकरते हुए मेहनत दर्द सहन किया है।--------खौफ के साये में जीने के आदी हो गये लोग,खतरनाक इंसानों से दोस्ती करअपनी हिफाजत
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वफा सस्ती कब थी-हिन्दी शायरी (vafaa sasti aur mahangi-hindi shayari)

वफा न कभी सस्ती थीजो कहें अब महंगी हो गयी,बाज़ार से हो गयी लापता बरसों सेखरीदने वालों की जो तंगी हो गयी।दाम चुकाकर वफा खरीद सकते हैं,पर उसके खालिस होने का नहीं दम भरते हैं,जब जब कीमत का नकाब उतरातब असलियत नंगी हो गयी। -------------कई अक्लमंद लगे हैं काम
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तलवार और शब्द-हिन्दी शायरी (talwar aur shabad-hindi shayari)

बुद्धिमान लोगपहले से ही तयशुदा जंग लड़ते हैं,एक दूसरे को नीचा दिखाने के लियेकहीं तलवार हवा में हिलातेकहीं कागज पर शब्द भरते हैं। सच में जो उतरते मैदान मेंउनको अब कोई नहीं पूछता,क्योंकि अब पर्दे के आसपास हीसिमट गयी हैं लोगों की आंखेंजिनके दृश्य केवल
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पुराने नायक, नये खलनायक-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (purane nayak, naye khalnayak-hindi vyangya kaivtaen)

राजशाही लुट गयीलुटेरे बन गयेज़माने के खैरख्वाह।उठाये थे पहले भी गरीबसाहुकारों का बोझभले ही भरकर रह जाते थे आह,अब भी कहर बरपा रहेलुटेरे तमंचों के जोर पर रोजफिर भी बोलना पड़ता है वाह वाह।---------इतिहास क्यों पुराना सुनाते हो,यहां घट रहा है रोज नया
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तरक्की के नाम पर-हिन्दी शायरी (tarakki ke nam par-hindi shayari)

अपने घर में जगह नहीं बचीअब परदेस में अपनी दौलत भरने लगे हैं,कहने को तो अपने ही सगे हैं। कमाने के नाम पर लूटा,सारी तिजोरियां भर गयीफिर अपनों से उनका विश्वास भी रूठा,कभी कभी अपने होने का दिखावा वह कर लेते हैं,दान की दलाली के धंधे  मेंसमाज सेवा करते
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बेबस इंसान सभी जगह रोता-हिन्दी शायरी (bebas insan sabhi jagah rota-hindi shayri)

वह इसलिये भोले नज़र आते हैंक्योंकि उनकी चालाकियां कोई पकड़ नहीं पाया।उनके घर के बाहर नाम पट्टिका परसाहूकार लिखा हैक्योंकि उनकी चोरी कोई पकड़ नहीं पाया।कौन उठायेगा उंगली उनके काम परपहरेदार को ही अपने घर लगाया। --------------कितने भलमानस इस धरती परविचर रहे
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परदा-हिन्दी शायरी (parda hindi shayri)

पर्दे के बाहर आता औरत का चेहराउनको बहुत डराता है,बयान न करे आदमी की हकीकतयह ख्याल उनको डराता है। इसलिये किताबों में छपे पुराने बयान कोरोज करते है सुनाकर ताजा,कभी इस धरती पर पैदा न हुए अपने फरिश्ते को जताते दुनिया का राजा,उसकी नसीहतों का हमेशा बजाते
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इश्क और डॉलर-हास्य व्यंग्य कवितायें (ishq aur dollar-hasya vyangya kavita)

सच्चा प्यार जो दिल से मिलेअब कहां मिलता है,अब तो वह डालरों में बिकता है।आशिक हो मालामालमाशुका हो खूबसूरत तोदिल से दिल जरूर मिलता है।---------- आज के शायर गा रहे हैंइश्क पर लिखे पुराने शायरों के कलाम,लिखने के जिनके बादगुज़र गयी सदियांपता नहीं कितनी बीती
 
दीपक भारतदीप
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दौलत का किला-हिन्दी शायरी (daulat ka kila_hindi shayri)

कैसे यकीन करेंउनके वादों परखड़े कर लिये अपने रहने के लिये महल,करते हैं गरीबों के लिये झुग्गियों की पहल,लोहे के चलते किलें में करते हैं सफर,टूटी सड़कों बनाने का वादा करते मगर,हर बार चमकते हैं आंखों के सामनेजब वादों का मौसम आता है।उनकी ईमानदारी की कसमों पर
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भूख और हवस-हिन्दी शायरी (bhookh aur havas-hindi shayri)

अपनी तबाही खुद करने परजब आमादा होता है इंसान,हवस में ढूंढता है अमृतचंद लफ्ज हमदर्दी के जताने वाले कोफरिश्ता समझ लेता है। पेट की भूख तो मिटा देती है रोटीपर हवस में अंधा इंसानअपनी तकदीर अपने हाथ से बिगाड़ लेता है।--------रोटी के भूखे को एक टुकड़ा भीखुश कर
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ईमानदार अब तबाह हो गये-हिन्दी शायरी (imandar ab tabah ho gaye-hindi shayri)

उनके दिखाये सपनों का पीछा करते कई घर तबाह हो गये,अंधेरे को भगाने के लिये जलाई आग में अंधे स्वाह हो गये।जंग भड़काई थी जमाने में, ईमान और इंसाफ लाने के लियेहार गये तो अपने ही दोस्तों के खिलाफ एक गवाह हो गये। मुखौटा लगाया पहरेदार का, सब का भरोसा जीतने के
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अपने दर्द पर हंसना सीख लो-हिन्दी शायरी (apne dard par hansna seekh lo-hindi shayri)

अपने दर्द का बोझ कब तक सहेंगे।हल्का लगेगा जब दिल से हंसेंगे।अपने ख्वाब पूरे होने की सौदागरों से चाहतकब तक ईमान बेचकर पूरी करेंगे।बाजार में बिकती है ढेर सारी शयेंउनके कबाड़ होने पर, घर कब तक भरेंगे।दिखा रहे हैं बड़े और छोटे पर्दे पर नकली दृश्यझूठे जज़्बातों
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ज़हर और अमृत-हिंदी शायरी (zahar aur amrit-hindi shayri)

यूं तो तन्हाई में भी इतना नहीं डरे थेजितना भीड़ में आकर खौफ खाने लगे.घर से निकलते हुए सोचा नहीं था किज़माने भर के कायरों से मुलाकात होगी,बिके थे लोग बाज़ार के सौदागरों के हाथदलाली लेकर ज़हर को अमृत बताने लगे..---------------------शहीदों के नाम पर लगाते हैं
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