पसंद करें
1
नापसंद करें

कृत्या की वर्कशॉप में विचाराधीन 'व्हाय पोएट्री मैटर्स' सवाल, जितना शास्त्रीय है उतना ही रचनात्मक भी है

'कृत्या' द्वारा 'व्हाय पोएट्री मैटर्स' विषय पर आयोजित की जा रही वर्कशॉप का निमंत्रण मिलते / देखते ही मुझे अभी हाल ही में प्रकाशित हुए कश्मीर की युवा कवयित्री आशमा कौल के तीसरे कविता संग्रह 'बनाए हैं रास्ते' की भूमिका में लिखी पंक्तियाँ याद हो आईं, जिनमें
 
MUKESH MISHRA
टैग: hindi kavita
पसंद करें
4
नापसंद करें

गुलाम मोहम्मद शेख की दो कविताएँ

|| दिल्ली ||टूटे टिक्कड़ जैसे किले परकच्ची मूली के स्वाद की सी धूपतुगलकाबाद के खंडहरों में घास और पत्थरों का संवननपरछाइयों में कमान, कमान में परछाइयाँ; खिड़की मस्जिदआँखों को बेधकर सुई की मानिंदआरपार निकलतीजामामस्जिद की सीढ़ियों की क़तारपेड़ की जड़ों से अन्न
 
ANAL KUMAR
टैग: hindi kavita
पसंद करें
0
नापसंद करें

वंशी माहेश्वरी की पाँच कविताएँ

|| पुल की तरह खुला है दिन ||सुबह से तनकरबिछा है पूरा दिनपिछली रात के अनंत स्पर्श लिए |धरती से कुछ ऊपरआकाश से कुछ नीचेपुल की तरह खुला है दिन |तमाम अनुभूतियाँ / स्मृतियाँजुड़ेंगीइसके अंतिम छोररात की किरकिराती आँखों मेंपूरा दिन फिर आयेगाहमेशाव्यतीत की तरह
 
ANAL KUMAR
टैग: hindi kavita
पसंद करें
1
नापसंद करें

केदारनाथ सिंह की तीन कविताएँ

|| आवाज़ ||चुप रहने से कोई फायदा नहींमैंने दोस्तों से कहाऔर दौड़ा खेतों की ओरकि शब्द कहीं पक न गए होंयह दोपहर का समय थाऔर शब्द पौधों की जड़ों में सो रहे थेखुशबू यहीं से आ रही थी - मैंने कहायहीं - यहीं - शब्द यहीं हो सकता है - जड़ों मेंपकते हुए दानों के
 
ANAL KUMAR
टैग: hindi kavita
पसंद करें
2
नापसंद करें

रफ़ीक़ ख़ान का समय-बोध

|| खोज ||एक सपना जो धूल मेंलोट रहा हैएक चाहत जो पेड़ सेटूटकर गिरती हुईपत्ती की तरह थरथराती रही है |एक सधी हुई आवाज़जो चीख़ बनकर बिखर चुकी हैएक सोचलकड़ी के चाकू में तब्दील हो चुकी हैकिताबों की आग थककरराख हो चुकी हैउन चीज़ों का भारी टोटा हैजिनसे गढ़े जाते
 
ANAL KUMAR
टैग: hindi kavita
पसंद करें
0
नापसंद करें

प्रकृति-बोध का संदर्भ, अज्ञेय को अपने समकालीन कवियों के बीच एक अलग पहचान देता है

कविता में पर्यावरण संबंधी चिंताओं व सरोकारों की अभिव्यक्ति की 'खोजबीन' के दौरान अज्ञेय की 'नंदा देवी' श्रृंखला की कविताओं पर गौर किया तो एक दिलचस्प तथ्य यह पाया कि उनमें न सिर्फ पर्वतीय-प्रदेश की प्रकृति के कुछ अनुपम व मनोरम दृश्य उकेरे गये हैं बल्कि उन
 
MUKESH MISHRA
टैग: hindi kavita
पसंद करें
2
नापसंद करें

हिजम इरावत सिंह की कविता

|| हैं वे : एक ||शांत पर्वत को स्पर्श करने वालेलाल मिट्टी वाले रास्ते के किनारे कुछ लोगपत्थर तोड़ रहे हैं 'थड़' 'थड़' - हथौड़े से ज्येष्ठ की तपती धूप में |समीप से ही भरी हुई ट्रक-गाड़ियाँदौड़ते हुए चली गईं धमकाते हुए एक के बाद एक |थोड़ी दूर पर पहरा दे रहा
 
ANAL KUMAR
टैग: hindi kavita
पसंद करें
0
नापसंद करें

अज्ञेय की कविताएँ

|| नहीं तेरे चरणों में ||कानन का सौंदर्य लूट कर सुमन इकट्ठे कर केधो सुरभित नीहार-कणों से आँचल में मैं भर के,देव ! आऊँगा तेरे द्वार -किन्तु नहीं तेरे चरणों में दूंगा वह उपहार !खड़ा रहूँगा तेरे आगे क्षण-भर मैं चुपका-सा,लख कर मेरे कुसुम जगेगी तेरे उर में
 
ANAL KUMAR
टैग: hindi kavita
पसंद करें
0
नापसंद करें

दिनेश जुगरान की कविताएँ

|| रूख्सत से पहले ||मैंने ही हर बारदेर की हैनिर्णय लेने मेंहवा तो कई बार गुजरीमेरे बहुत करीब सेहाथ थे जिस्म में लिपटे हुएऔर मुट्ठियाँ बंदआवाज़ें भटकती हुईरोशनी वाले चौराहे सेगुजर करमेरी गली की कगार तकपहुँच गई हैंएक हत्यारा भीदाखिल होने वाला होगाउसकी
 
ANAL KUMAR
टैग: hindi kavita
पसंद करें
0
नापसंद करें

एकता की कोशिश-हिन्दी शायरी

भीड़ में एकता की कोशिश पर हंसी आ ही जाती है। जहां पहले ही चीख रहे हैं लोग अपनी करनी का बखान करते हुए बंद किये हैं कान, आंखों  से ढूंढ रहे अपने लिये सम्मान, वहां शांति के नारे की आवाज शोर करती नजर आती है। ——- वफादारी  खामोश जज़्बात के
पसंद करें
0
नापसंद करें

वह एक है, पर नाम अनेक-हिंदी शायरी

हमने पूछा दुनिया के मालिक का पता उन्होने ढोल बजाने वालों का घर बता दिया जो पहुंचे वहाँ सुना शोर तो हमने मालिक को भुला दिया वह है एक पर नाम अनेक डर था की कहीं हम लें नाम उनका कहीं और अधिक शोर न मच जाये अगर कहीं हमने भीड़ से अलग नाम लिया --------------
पसंद करें
0
नापसंद करें

अपने घर का बजट बनाने से क्या फायदा-हिंदी शायरी

गृहणी ने गृहस्वामी से कहा ''आज मैंने महिलाओं की एक किताब में पढा कि घर का खर्च भी बजट बनाकर करना चाहिए'' गृहस्वामी ने कहा ''बजट बनाने के लिए भी कागज़ और पेन चाहिए जो अपने बजट में नहीं आ सकतीं पड़ोस से उधार लेकर अख़बार और किताब जो तुम पढ़कर बढाती हो ज्ञ
पसंद करें
0
नापसंद करें

दीवारों पर लिखे सत्य पढे नहीं है-हिंदी शायरी

रिश्तों में अब कोई दरार नही है क्योंकि अब लोगों के दिलों में अब उनके लिए कोई जगह बची नहीं है भाई और भाई के बीच अब कोई दीवार नहीं खड़ी नही रह सकती क्योंकि रिश्ता रह गया है जैसे हवा में लटकी तख्ती नफ़रत जैसी कोई बात नहीं है क्योंकि समय के कमी की वजह से क
पसंद करें
2
नापसंद करें

भारत और आतंकवाद - क्षमादान अब त्यागो

कभी घुसपैठ कभी जेहाद और आतंकवादलगे हैं सबके सब करने भारत को बरबादभारत को बरबाद रोज हो रहा ख़ूनी खेलढुलमुल विदेश नीति की देखो रेलमपेल हमे बचाया मेजर संदीप ने देकर अपनी जान करकरे, काम्टे, शर्मा और कितने वीर जवान कितने वीर जवान अभी और शहीद कहलायेंगे क्या
टैग: hindi kavita
पसंद करें
10
नापसंद करें

वो मेरा पहला कवि सम्मेलन

अभी रविवार के दिन यहाँ प्रिंसटन में एक कवि सम्मेलन था जिसका आयोजन अनूप भार्गव जी ने किया था, हमें भी न्यौता मिला तो हम भी जा पहुँचे। इससे पहले कि कुछ गलतफहमी हो जाये मैं बताता दूँ हम छोटे से स्टेज में नही बड़ी सी दर्शक दीर्घा में बैठने के लिये गये थे
पसंद करें
7
नापसंद करें

होली पर लिखी एक कविता और एक विडियो

हमेशा की तरह इस बार भी होली आ ही गयी, ये होली भी ना, कभी आना नही भूलती, देखिये तो हर तरफ कैसे कैसे रंग बिखेरे हुए हैं इस ने। आप लोग तो होली होली के दिन ही मनायेंगे, हम तो हर त्यौहार की तरह इसे भी यहाँ वीकेंड में ही मनायेंगे। निठल्ला चिंतन पढने वाले [