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जीवन बस यहीँ अभी
मन ही मन दुखी तो वह पहले से ही रहता था पर जब से उसने एक सस्ते दामों पर मिल जाने वाली ज्योतिष की एक किताब में पढ़ लिया था कि उस जैसे जातक अपने किये कामों और भूलों के कारण पछताते रहते हैं तब से तो उसने दुख को ही अपने जीवन का ऐसा [...]
May 16 2010 09:07 PM



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