अन्धेरी रात उसने भी
परिन्दो को कभी क्या , माँ ने उड़ना सिखाया था ,
उन्हे तो बस किसी शाख से गिरकर बताया था । तुम्ह भी चुप चाप चले आये हो महफ़िल से ,
तुम्हे भी क्या उसी ने जाम पिलाया था ।
हमे अब गम से दहशन नहीं कोई,
मिला के दर्द ,जाम खुशी का पिलाया था ।
शहर की गलियों के [...]
Aug 02 2009 08:10 PM



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