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साहित्य कभी अप्रासंगिक नहीं हो सकता : विजय बहादुर सिंह

विजय वर्मा कथा सम्मान तथा हेमंत स्मृति कविता सम्मान में जुटे दिग्गज रचनाकारमुंबई : "यह सच है कि सभ्यता का ज्यों-ज्यों उत्कर्ष होता जाता है, मनुष्य उतना ही अकेला पड़ता जाता है इसलिये साहित्य का दायित्व भी उतना ही बढ़ता जाता है। ऐसे में कोई कुछ भी कहे
 
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विजय वर्मा कथा सम्मान और हेमंत स्मॄति सम्मान समारोह 2010 के लिए आमंत्रण

विजय वर्मा कथा सम्मानहेमंत स्मॄति सम्मानसमारोह वर्ष २०१० आप सादर आमंत्रित हैं॥निवेदक:- हेमंत फ़ाउंडेशनसाहित्यिक एवम सांस्कॄतिक विभागश्री जगदीश प्रसाद झाबरमल टिबडेवाला विश्वविध्यालय, झुंझुंनू [राजस्थान]संचालक-श्री राजस्थानी सेवा संघ,मुंबईविजय वर्मा कथा
 
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