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हाइकु-६

१- अपना दर्द भोगना पड़ता है हर किसी को। २- प्रतिध्वनियाँ गूँजती हैं रगो में जर्जर आस्था। ३- चाँदनी रात मकबरा खामोश ताजमहल? ४- शब्दों की भीड़ बीमार कल्पनाएँ अर्थ रहित। ५- सूरज फीका चाँद पीला-पीला सा चाँदनी रोई । ६- दिगभ्रमित दमघोटूँ खामोशी मूल्यहीनता ।
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हाइकु-५

१- वंश का नाम चलाता है आत्मज बेबुनियाद । २- खलीफ़ा बुर्ज मेहनत किसी की नाम किसी का? ३- क्रान्ति का बीज चिंगारी बनी आग जीत निश्चित । ४- सुलगा दिल रोया था रातभर ज़ुबां खामोश । ५- बिना कफ़न हो जाती हैं दफ़न दहेज बिना । ६- पीड़ा का मौन पिघलता प्यार से [...]
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हाइकु-४

१- मिट्टी का तेल दियासलाई की लौ बहू की बलि । २- सपने बुने अलगनी में पड़े सूखते रहे। ३- दिन या रात चन्द्रमा परेशान ब्रह्म मुहुर्त्त? ४- दर्पण का सच टूट-बिखर कर रहा अमिट । ५- चाँद हैरान सूरज परेशान चाँदनी रोई । ६- जीवनदाता बन गया राक्षस सुरक्षा कहाँ ? ७-
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हाइकु

हाइकु 1 जीवन एक समझौता परक मृत्यु अनेक। 2 पारदर्शिता आफिस के हिसाब का जाल तंत्र । 3 मजबूरियाँ कर नहीं सकते अहसास से। 4 जानवर का आदमी का वजूद कुछ खास है। 5 सहज गुण संयम नियंत्रण श्रेष्ट लक्षण। 6 पर्यावरण बरसात के बाद शुभ्र धवल। 7 सब ऊपर हृदय समर्पण उल
 
DHARAM PRAKASH JAIN
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