दिल तो बच्चा है जी : आह गुलजार वाह विशाल
ये कहना अतिशयोक्ति न होगी कि फ़िल्म की सिचुएशन के हिसाब से ” दिल तो बच्चा है जी ” दशक का सबसे अच्छा गीत है। इस लिहाज से ये गीत पचास और साठ के दशक के उन फ़िल्मी गीतों के श्रेणी में शामिल हो जाता है [...]
दिल तो बच्चा है जी : आह गुलजार वाह विशाल
ये कहना अतिशयोक्ति न होगी कि फ़िल्म की सिचुएशन के हिसाब से ” दिल तो बच्चा है जी ” दशक का सबसे अच्छा गीत है। इस लिहाज से ये गीत पचास और साठ के दशक के उन फ़िल्मी गीतों के श्रेणी में शामिल हो जाता है [...]
हाल ही में कहीं से लौटना हो रहा था और कार में ठसाठस बैठे हम सब ऍफ़ एम् रेडियो में बज रहे बेसुरे गानों और unimaginative विज्ञापनों से त्रस्त बातों को फूटबाल की तरह एक दिशा से दूसरी दिशा में ले जा रहे थे कि अचानक रेडियो पर विशाल भारद्वाज के संगीत में
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।नवरात्र के नौ दिन हम देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना करते हैं... व्रत, उपवास, फल, फूल और ना जाने क्या क्या... सभी अपनी तरह से देवी को खुश करने में लगे रहते हैं... नवरात्र के
पिछले कुछ दिनों से हमारे शहर लखनऊ में राष्ट्रीय पुस्तक मेला लगा हुआ था... रोज़ अख़बार में पढ़ते थे कि हर बार कि तरह इस बार भी किताबों का बहुत ही अच्छा संग्रह है, पर व्यस्तता के कारण जा नहीं पा रहे थे ... पिछले हफ्ते भी जाने का प्रोग्राम बनाया पर किन्ही
"उसको भूले से पढ़ लिया था कभी, तब से आदत बिगड़ गई शायद,तब से हैं मेज़ पे खुली रखी, हज़ार रातें पश्मीने की"aaj kaafi dino ki masroofiyat ke baad kuchh samay mila hai to socha sabse pehle wo kaam kar le jo shayad aaj se paanch din pehle hi kar lena chahiye