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आओ आज नाम बदल लें…!

आओ आज नाम बदल लें…! ले लो इस नाम से जुड़ी सब दौलत और शौहरत, मुझे बेनामी का सुकून लौटा दो…. अक्सर तुम्हे देखा है नुक्कड़ पे बच्चो के साथ फुटबाल खेलते, मैं भी सनडे को साहब के साथ गोल्फ खेलने जाता हूँ….. बोलो तो खेल बदल लें…
 
Gaurav Sangtani
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किसी की कोई जिम्मेदारी नही….!!!

क्या सरकार की कोई जिम्मेदारी नही? यु पी ऐ सरकार का बर्ताव पिछले कुछ दिनों से कितना गैर जिम्मेदारना रहा है, इस पर शायद ही किसी को कोई शक हो | शायद सरकार ये बताना चाहती है कि वो किसी कम या घटना के लिए जिम्मेदार ही नही | उसके हाथ में कुछ भी नह
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सुना है…….

सुना है वक़्त के पंख हुआ करते हैं…. कुछ लम्हों में हमने इसे ठहरे हुए देखा है. किसी की ज़ुल्फ़ो में अटके हुए देखा है झील सी आँखों में भटकते हुए देखा है….. बहुत तेज़ी से निकल गया जब भी रोकना चाहा इसको, सारी यादें साथ ले गया समेटना चाहा जिनको. पर वो कुछ
 
Gaurav Sangtani
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धुआँ अभी बाक़ी है……….

बहुत पहले लिखा था ये शेर, आज फिर याद आ रहा है….. आग बुझ गयी, पर धुआँ अभी बाक़ी है. हम कहते हैं इश्क़ नहीं, पर नशा अभी बाक़ी है. नशे का क्या है, ये तो उम्र भर रहेगा. शुक्र है खुदा का, जान अभी बाक़ी है. - गौरव संगतानी
 
Gaurav Sangtani
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दर्द…

हम दर्द को दबाते रहे, ये फूट फूट निकलता रहा कभी चेहरे से झलकता रहा, कभी आँखों से छलकता रहा. हम हर मोड़ पर पुकारा किए और वो हमसे बचके चलता रहा. कितनी दफ़ा गिरे हम राहों मे वो बस दूर से तकता रहा. हमेशा ख्वाब सा ही बनकर रहा मेरे लिए वो, मैं हरदम पकड़ता 
 
Gaurav Sangtani
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जादूगरी

ये कैसी है तेरे इश्क की जादूगरी, अभी तू यहीँ है और नहीं अभी | अभी तुझसे मिलकर हँसे थे हम, अभी तुझे खोकर रो दिये भी | तू ही तन्हाइयोँ में साथ मेरे, तू ही भीङ में करे तन्हा | तू ही तो ख्वाबोँ में है मेरे, तू ही रातों को जगाये भी | य
 
Gaurav Sangtani
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काश कभी…..

काश कभी तुमने मेरी चाहत को समझा होता. चाहत ये ना थी सब कुछ मिले, पर कभी कुछ तो मिला होता…. हर क़दम पे तेरे साथ चले थे हम, किसी क़दम पे हमें भी इसका सिला मिला होता…. काश कभी तुमने मेरी चाहत को समझा होता. अब हम थक गये हैं इस चाहत से, इस जीन
 
Gaurav Sangtani
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तेरी याद में

कभी यूँ ही लिखा था कुछ तेरी याद मे, तेरी याद आयी तो फिर से गुनगुना दिया आज…. “दर्द की इंतहाँ हो गयी है यारों | सुबह चले थे अब शाम हो गयी है यारों | थक गयें हैं लेकिन कोई सहारा नहीं मिलता | समंदर में मौजों को किनारा नहीं मिल
 
Gaurav Sangtani
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समझे नहीं जो खामोशी मेरी

समझे नहीं जो खामोशी मेरी, मेरे लब्जों को क्या समझेंगे | बचते रहे उम्र भर साये से मेरे, मेरे जख्मों को क्या समझेंगे | भूल जाना यूँ तो नहीं है, रवायत मोहब्बत की | समझे नहीं जो हालात मेरे, इन रस्मों को क्या समझेंगे | - गौरव संगतानी
 
Gaurav Sangtani
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जाते हुए दिन नें

एक क्षणिका….! जाते हुए दिन ने शाम से बस इतना ही कहा ‘अब भी उदास बैठा है वो, न जाने किस गम को दबाए बैठा है वो | उगते हुए सूरज की किरणें, पँछियों की चहचहाहट, खिलते हुए फूल, सुबह की चाय की चुस्की, स्कूल जाते बच्चों का शोर, धान कूटती औरत
 
Gaurav Sangtani
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पर अब भी बहुत कुछ याद है मुझे

बहुत भुलाना चाहा, बहुत कुछ भुलाया, पर अब भी बहुत कुछ याद है मुझे | वो इश्क की राहों में पहले कदम, उन कदमों पे लङखङाना और संभलना याद है मुझे || वो तेरा नजरे मिलाना और पलकें झुकाना याद है मुझे | वो तेरा सब कुछ समझना और बच के निकलना
 
Gaurav Sangtani
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जिंदगानी

जिंदगी हर पल बस यही सिखाती है, चलने का नाम ही जिंदगानी है | जो थम गया तो मिट गया, दरिया सिर्फ बहता पानी है || - गौरव संगतानी
 
Gaurav Sangtani
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वो चाहत कहाँ से लाओगे…!

जितना चाहा है तुम्हे…. वो चाहत कहाँ से लाओगे…! चाहत मिल भी गयी तो ये दिल कहाँ से लाओगे..! दिल ढूँढ भी लिया तुमने तो वो इतना जल नही पाएगा, मैं फिर कहता हूँ….. जितना चाहा है तुम्हे कोई चाह नही पाएगा…! - गौरव संगतानी
 
Gaurav Sangtani
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शाम

शाम होते ही चरागों को बुझा देता हूँ मैं, इक दिल ही काफी है तेरी याद में जल जाने के लिए | -अग्यात
 
Gaurav Sangtani
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मेरा मुक़द्दर….!

रातों को चुपके से कोई साया आता है, हवा का हर झोंका तेरी याद लाता है | कब तक यूँ ही तपड़ता रहूँगा मैं, क्यों हर बार मेरा मुक़द्दर मेरे दर से लौट जाता है || गौरव संगतानी
 
Gaurav Sangtani
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तेरा गम

हो गयी है शाम, तेरी याद आ रही है | हर तरफ है धुन्ध, हर आस जा रही है || खो गया है अब तो मेरा खुद का वजूद भी, ना जाने किस लिहाज़ से ये सांस आ रही है|| तेरे दिए गम के साथ ही जिए जा रहा हूँ, कैसे कर लूँ यकीन तेरी तरह छोड़ के ना ज
 
Gaurav Sangtani
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कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं….

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं, तुम कह देना कोई खास नही……. एक दोस्त है कच्चा पक्का सा, एक झूठ है आधा सच्चा सा….. जज़्बाद को ढकके एक परदा बस, एक बहाना अच्छा सा….. जीवन का ऐसा साथी है, जो दूर ना होके पास नही……. कोई तुमसे
 
Gaurav Sangtani
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आख़िर क्यूँ..

कितनी दफा हम पूछते हैं न….. आख़िर क्यूँ..??? कुछ बातों का कोई कारण नही होता कोई अर्थ नहीं होता कोई तर्क नहीं होता आप स्वीकारें न स्वीकारें…. कोई फर्क नही होता….!!! कुछ सवालों का कोई जवाब नही होता कोई शुरुआत नही होती कोई अंत नहीं होत
 
Gaurav Sangtani
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क्या लिखूं….

क्या लिखूं…. पैगाम लिखूं… तुझे जज़्बात लिखूं… या अपने ये हालात लिखूं…. क्या लिखूं…. रातें लिखूं… वो बातें लिखूं… या ठहरी हुई मुलाक़ातें लिखूं… क्या लिखूं…. जीत लिखूं… इसे हार लिखूं….
 
Gaurav Sangtani