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गंगुबाई- चुप हो गयी कोयलिया....

पिछले दो वर्षों से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रति मेरी रूचि का बढ़ना मेरे लिए बहुत आश्चर्यजनक घटना है। आश्चर्यइ इस दुःख के साथ है क्योंकि मेरी पीढ़ी के पास शास्त्रीय संगीत को सुनने और उसे छू पाने के अवसर अब ना के बराबर है। संगीत के सारे माध्यमों
 
Gopal Singh
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