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स्त्रियाँ : गाँधीजी : अनु. काशीनाथ त्रिवेदी

हिन्दुस्तानकी स्त्रियाँ जिस अँधेरेमें डूबी हुई थीं , उसमें से सत्याग्रहके तरीकेने उन्हें अपने-आप बाहर निकाल लिया है ; और यह भी सच है कि दूसरे किसी तरीकेसे वे इतने कम समयमें , जिस पर विश्वास नहीं हो सकता , आगे न आ पातीं । फिर भी स्त्री-जातिकी सेवाके कामको
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कोंकण-केरलम-आसमान / स्लाईड्स

‘ मातृभूमि ’ केरल का एक प्रमुख दैनिक है । केरल के नौ शहरों के अलावा यह मुम्बई , चेन्नै , बंगलूरू और दिल्ली से भी छपता है । ७५ वर्ष पूर्व महात्मा गांधी अपने केरल प्रवास के दौरान इस अखबार के दफ़्तर में आये थे । इस स्मृति को अखबार वर्ष पर्यन्त भिन्न
 
अफ़लातून
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मोहन और महादेव : बापू की गोद में (१२)

बापू के पास आने के बाद इक्कीस वर्षों में काका ने दो बार छुट्टी ली थी । पहली बार टाइफाइड हो जाने पर और दूसरी बार ब्लडप्रेशर ( रक्तचाप ) बढ़ जाने पर । काका के पिताजी का देहान्त हुआ , तब भी काका का काम जारी ही था । इक्कीस साल के बाद [...]
 
अफ़लातून
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सिंथेटिक वस्त्र : एक महिला सामाजिक कर्मी का नोट / नीला हार्डीकर

खादी की राखी ’ पर मेरी एक पोस्ट पर नीला हार्डीकर ने एक गंभीर टिप्पणी डाक से भेजी थी । इसे मैंने अलग पोस्ट के रूप में प्रकाशित किया था । इसके साथ ही नीलाजी ने ’सिंथेटिक वस्त्रों’ पर एक सुन्दर नोट भी भेजा था। इसे आज प्रकाशित किया जा रहा है । [...]
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अपने-अपने गांधी, अपने-अपने राम

गांधी टाइटल लगाकर कितने लोग घूमते हैं लेकिन गांधी सुनकर तो जेहन में एक ही नाम घूमता है- मोहनदास करमचंद गांधी। इन्हें हिंदुस्तान अपना राष्ट्रपिता और दुनिया महात्मा मानती है। इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, संजय गांधी, सोनिया गांधी, मेनका गांधी, राहुल गांधी
 
विचित्र मणि
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शिक्षा का मूल है - ग्रहण करना

जड़ निर्भयता निर्भयता ही सब शिक्षाओं की जड़ है। यहां से शिक्षा आरंभ होती है, समाप्त नहीं। यदि तुम उसकी नींव पर अपनी शिक्षा खड़ी नहीं करोगे तो वह एक दिन गिर पड़ेगी। ...विनयपूर्वक और वीरता से, फल की चिन्ता किये बिना, तुम सत्य बोला करो जैसा कि बारह वर्ष के
 
प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर
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जारी है पूंजी का ‘आदिम संचय’ प्राकृतिक दोहन द्वारा:ले. सुनील (३)

इस सैद्धान्तिक अन्तर्विरोध का हल खोजने की कोशिश में हम एक नये सत्य पर पहुचते हैं । दरअसल पूंजीवाद का तीन - चार सौ सालों का पूरा इतिहास देखें, तो वह लगातार प्राकृतिक संसाधनों पर बलात कब्जा करने और उससे लोगों को बेदखल करने का इतिहास है । एशिया व अफ्रीक
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अर्थशास्त्र - मार्क्स , लोहिया से आगे (२): आंतरिक उपनिवेश,ले. सुनील

पिछले भाग से आगे : जाहिर है लोहिया का यह निष्कर्ष गलत साबित हुआ । पूंजीवाद ज्यादा दीर्घायु और ज्यादा स्थायी साबित हुआ तथा कई संकटों को पार कर गया । मार्क्स की ही तरह लोहिया की भविष्यवाणी भी गलत साबित हुई । दरअसल , इस निबन्ध को वे पचीस तीस साल बाद लिख