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एक चिड़िया…. अनेक चिड़िया…

मेरे पापा कहते हैं की उनको बचपन में ‘एक चिड़िया.. अनेक चिड़िया’ वाला गाना बहुत अच्छा लगता था. वो वाला गाना मैंने तो नहीं सुना पर चिडियों, जिन्हें मैं ‘चिया’ कहती हूँ, उनको बुलाना बहुत अच्छा लगता है. कल मैं पापा को भी ले गयी अपने
 
लविज़ा | Laviza
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दो तरह के लोग-हिंदी कविता (two tpyw of man-hindi poem

धरती पर अपने कदम दर कदम चलते हुए जब नजर करता हूं नीचे की तरफ तब जहां तक देखता हूं वहीं तक ख्याल चलते हैं दुनियां बहुत छोटी हो जाती है। आंखें उठाकर देखता हूं जब आकाश में चारों तरफ घुमते हुए उसके अनंत स्वरूप के दृश्य से इस दुनियां के बृहद होने की अनुभू
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