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कटी कटी रे दाढ़ी उसकी

सुनी तो उसने कभी किसी की नहीं न माँ बाप की न अध्यापकों की न बुजुर्गों की न यार दोस्तों की अपनी ही मर्जी का मालिक रहा| लाख दुनिया कहे नहीं बनाई तो नहीं ही बनाई दाढ़ी शादी भी उसकी मनमौजी हरकतों पर रोक न लगा पायी अपनी मर्जी से बना ली तो बना ली [...]
 
स्वार्थ
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जिन से पिता जी ने कर्ज लिया था वे परेशान करते हैं, क्या किया जाए?

संजय जैन ने पूछा है -- पिताजी ने अपने मित्रों और रिश्तेदारों से बहुत अधिक ऋण लिए, अब वे जीवित नहीं हैं। वे लोग जिन्होंने पिता जी को ऋण दिए थे मुझे सता रहे हैं। मैं अपने पिता जी के ऋण चुकाने की स्थिति में नहीं हूँ। मेरा परिवार ऋणदाताओँ की फोन कॉल्स से
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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Every night when I touch you my child

Every night when I feel you with my hand, In your mother’s womb when you flick and bend, I touch her belly where I can feel you move, I can feel you; can you feel me too ? My little one I await you to come, to take you in arms – my good-luck
 
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष
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இன்று தந்தையர் தினம்

தந்தையின் பாசம்! என் செல்லப் பெண்ணே!!! பத்து மாதம் சுமக்க முடியவில்லை என்று சேர்த்து வைத்து இயலும் வரை சுமக்கிறேன் தோளிலும் முதுகிலும் … (கவிதைக்கு நன்றி: அமுதா)
 
எஸ்.கே