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कई प्रजातियां, एक ग्रह, एक भविष्य

विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2010 -कई प्रजातियां, एक ग्रह, एक भविष्यइस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस अफ़्रीकी महाद्वीप के एक छोटे व हरे-भरे देश रवांडा में मनाया जा रहा है, इस मुल्क को यह प्रतिष्ठा इस लिए मिली कि आर्थिक रूप से संमृद्ध न होने के बावजूद यहाँ के
 
दुधवा लाइव
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प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति उपेक्षा भाव और अज्ञान

भाई अफ़लातून ने अपने ब्लॉग http://samatavadi.wordpress.com पर ‘एक नदी थी जहां अब हाईस्कूल, खेल का मैदान और मछली बाजार हैं’ शीषर्क से डाली पोस्ट में केरल के कन्नूर जिले की कक्काड नदी को बचाने के लिए चल रही लड़ाई और हालात का विवरण दिया है। कन्नूर की कक्काड
 
ShrikantAsthana
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सन् २०३० के बाद क्या गंगा बचेगी?

कल इस बारे में समाचार देखा कि २०३० तक हिमालय के हिमनद अपने आकार के १/५ ही रह जायेंगे। वैसे इस बारे में पहले भी को चेतावनियाँ आ चुकी हैं मगर यह ताज़ा रिपोर्ट कहती है कि इन हिमनदों के घटने का स्तर बहुत तेजी से बढ़ रहा है और अगर पृथ्वी यूं ही गर्म होती र
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जारी है पूंजी का ‘आदिम संचय’ प्राकृतिक दोहन द्वारा:ले. सुनील (३)

इस सैद्धान्तिक अन्तर्विरोध का हल खोजने की कोशिश में हम एक नये सत्य पर पहुचते हैं । दरअसल पूंजीवाद का तीन - चार सौ सालों का पूरा इतिहास देखें, तो वह लगातार प्राकृतिक संसाधनों पर बलात कब्जा करने और उससे लोगों को बेदखल करने का इतिहास है । एशिया व अफ्रीक
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अर्थशास्त्र - मार्क्स , लोहिया से आगे (२): आंतरिक उपनिवेश,ले. सुनील

पिछले भाग से आगे : जाहिर है लोहिया का यह निष्कर्ष गलत साबित हुआ । पूंजीवाद ज्यादा दीर्घायु और ज्यादा स्थायी साबित हुआ तथा कई संकटों को पार कर गया । मार्क्स की ही तरह लोहिया की भविष्यवाणी भी गलत साबित हुई । दरअसल , इस निबन्ध को वे पचीस तीस साल बाद लिख