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फरिश्तों का सम्मेलन -हिन्दी व्यंग्य कविता (sammelan-hindi satire poem

अब संभव नहीं है कोई कर सके सागर का मंथन या डाले हवाओं पर बंधन। इसलिये नये फरिश्ते इस दुनियां के रोकना चाहते हैं जहरीली गैसों का उत्सर्जन जिसे छोड़ते जा रहे हैं खुद समंदर से अधिक खारे विष से अधिक विषैले नीम से अधिक कसैले अपनी उन फरिश्तों ने महफिल सजाने के
 
दीपक भारतदीप
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विदुर नीति-अर्थ प्राप्ति के लिए धर्म का पालन करें (arth aur dharm-hindu adhyamik sandesh)

यस्यात्मा विरतः पापाद कल्याणे च निवेशितः। तेन स्र्वमिदं बुद्धम् प्रकृतिर्विकृतिश्चय वा।। हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर कहते हैं कि जिसकी बुद्धि पाप से परे होकर कल्याण के मार्ग पर आ जाये वह इस संसार में हर वस्तु कि प्रकृतियों और विकृतियों को अच्छी
 
दीपक भारतदीप
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कबीर के दोहे-अपनी सराहना स्वयं न करें (kabir darshan-dosron ke dosh)

आपन को न सराहिये, पर निन्दिये न नहिं कोय। चढ़ना लम्बा धौहरा, ना जानै क्या होय।। संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि अपने मूंह से कभी आत्मप्रवंचना और दूसरे की निंदा न करें। क्योंकि कभी आचरण की ऊंचाई पर हमारे व्यकितत्व और कृतित्व को नापा गया तो तो पता नहीं
 
दीपक भारतदीप
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मनु स्मृति-गोद में रखकर भोजन करना ठीक नहीं (bhojan karne ka tarika-manu smruti)

न नृत्येन्नैव गायेन वादित्राणि वादयेत्। नास्फीट च क्ष्वेडेन्न च रक्तो विरोधयेत्।। हिंदी में भावार्थ-मनुमहाराज कहते हैं कि नाचना गाना, वाद्य यंत्र बजाना ताल ठोंकना, दांत पीसकर बोलना ठीक नहीं और भावावेश में आकर गधे जैसा शब्द नहीं बोलना चाहिये। न कुर्वीत
 
दीपक भारतदीप