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घंटाभंगुर बिजली

बिजली दर्शन से जुड़े कतिपय महत्वपूर्ण पहलू इस प्रकार हैं- जीवन क्षणभंगुरम् च बिजली घंटा भंगुरम् ज्ञानी पुरुषस्य यह लक्षणम्,ना बिजली आने की खुशी, ना बिजली जाने का गम भावार्थ-जीवन क्षणभंगुर है और बिजली घंटाभंगुर है। अभी आयी है, अभी चली जायेगी। कहां से
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बिजलीमय मैं सब जग जानी

बिजली पर कवि जालीदास का रचनात्मक चिंतन इस प्रकार है- 1- रुखा सूखा खाय कर छत पर जाकर सोय देख परायी बिजली, टेंशन में मत होय भावार्थ-कई दिनों से बिजली नहीं आ रही है। फ्रिज काम नहीं कर रहा है। जो कुछ फ्रिज में रखा था, वह सब सूख गया है। सब रुखा हो गया है,