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भर्तृहरि नीति शतक-धन की ऊष्मा से रहित मनुष्य क्या रह जाता है (heat of money-hindu sandesh)

भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि  —————————————– तानींद्रियाण्यविकलानि तदेव नाम सा बुद्धिरप्रतिहता वचनं तदेव। अर्थोष्मणा विरहितः पुरुषः क्षपोन सोऽष्यन्य एव भवतीति
 
दीपक भारतदीप
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विचार और विषय को निर्बाध गति से बाहर आने दें-आलेख

हर लिखने वाले की रचना में साहित्य ढूंढना ठीक नहीं है। उसी तरह हर साहित्यकार में भाषा शिल्प की संभावना भी नगण्य रहती है। मुख्य बात है कि लिखने वाले दो तरह के होते हैं एक तो वह जो अपने मन और बुद्धि में आते जाते विचारों को अभिव्यक्ति देने के लिये लिखते
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