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आओ आज नाम बदल लें…!

आओ आज नाम बदल लें…! ले लो इस नाम से जुड़ी सब दौलत और शौहरत, मुझे बेनामी का सुकून लौटा दो…. अक्सर तुम्हे देखा है नुक्कड़ पे बच्चो के साथ फुटबाल खेलते, मैं भी सनडे को साहब के साथ गोल्फ खेलने जाता हूँ….. बोलो तो खेल बदल लें…
 
Gaurav Sangtani
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स्वप्न

अक्सर मन स्वप्न बुनने लगता है उन ढ़ेर से सपनों में से कुछ पूरे हो जाते हैं कुछ बीच में ही टूट जाते हैं पर हर पुराने सपने के बाद नया सपना देखने लगता है मन क्योंकि स्वप्न न हों तो जीवन रसहीन हो जाये !
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दिल मानता नहीं…..

जीवन हर पल कुछ सिखाना चाहता है, एक नयी सीख, एक नया सबक… पर ना जाने क्यूं ये दिल कुछ सीखना ही नही चाहता, कुछ समझना ही नहीं चाहता….. या मानूं तो, जो दिख रहा है, उसे स्वीकरना नही चाहता….. पर हमारे स्वीकारने या ठुकराने से सच बदल तो नही 
 
Gaurav Sangtani
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सितारों से जगमगाते ख्वाब…..

मोहब्बत पलकों पे कितने हसीं ख्वाब सजाती है.. फूलों से महकते ख्वाब.. सितारों से जगमगाते ख्वाब.. शबनम से बरसते ख्वाब.. फिर कभी यूँ भी होता है की पलकों की डालियों से ख्वाबों के सारे परिंदे उड़ जाते हैं और आँखें हैरान सी रह जाती हैं. - जावेद अख़्तर
 
Gaurav Sangtani
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तेरे बिन……

तेरे बिन मैं इस जीवन को गुज़ारूं कैसे . हर घड़ी सोचता हूं तुझको जहन से उतारूँ कैसे.. जब कोई आहट ना हुई, ना ही कोई दस्तक दी तुमने, कैसे चले आए इस दिल में, दिल को संभालूं कैसे.. तेरे बिन मैं इस जीवन को गुज़ारूं कैसे . हर घड़ी सोचता हूं तुझको जहन से उता
 
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धुआँ अभी बाक़ी है……….

बहुत पहले लिखा था ये शेर, आज फिर याद आ रहा है….. आग बुझ गयी, पर धुआँ अभी बाक़ी है. हम कहते हैं इश्क़ नहीं, पर नशा अभी बाक़ी है. नशे का क्या है, ये तो उम्र भर रहेगा. शुक्र है खुदा का, जान अभी बाक़ी है. - गौरव संगतानी
 
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सुना है…….

सुना है वक़्त के पंख हुआ करते हैं…. कुछ लम्हों में हमने इसे ठहरे हुए देखा है. किसी की ज़ुल्फ़ो में अटके हुए देखा है झील सी आँखों में भटकते हुए देखा है….. बहुत तेज़ी से निकल गया जब भी रोकना चाहा इसको, सारी यादें साथ ले गया समेटना चाहा जिनको. पर वो कुछ
 
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काश कभी…..

काश कभी तुमने मेरी चाहत को समझा होता. चाहत ये ना थी सब कुछ मिले, पर कभी कुछ तो मिला होता…. हर क़दम पे तेरे साथ चले थे हम, किसी क़दम पे हमें भी इसका सिला मिला होता…. काश कभी तुमने मेरी चाहत को समझा होता. अब हम थक गये हैं इस चाहत से, इस जीन
 
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तेरी याद में

कभी यूँ ही लिखा था कुछ तेरी याद मे, तेरी याद आयी तो फिर से गुनगुना दिया आज…. “दर्द की इंतहाँ हो गयी है यारों | सुबह चले थे अब शाम हो गयी है यारों | थक गयें हैं लेकिन कोई सहारा नहीं मिलता | समंदर में मौजों को किनारा नहीं मिल
 
Gaurav Sangtani
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दर्द…

हम दर्द को दबाते रहे, ये फूट फूट निकलता रहा कभी चेहरे से झलकता रहा, कभी आँखों से छलकता रहा. हम हर मोड़ पर पुकारा किए और वो हमसे बचके चलता रहा. कितनी दफ़ा गिरे हम राहों मे वो बस दूर से तकता रहा. हमेशा ख्वाब सा ही बनकर रहा मेरे लिए वो, मैं हरदम पकड़ता 
 
Gaurav Sangtani
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जादूगरी

ये कैसी है तेरे इश्क की जादूगरी, अभी तू यहीँ है और नहीं अभी | अभी तुझसे मिलकर हँसे थे हम, अभी तुझे खोकर रो दिये भी | तू ही तन्हाइयोँ में साथ मेरे, तू ही भीङ में करे तन्हा | तू ही तो ख्वाबोँ में है मेरे, तू ही रातों को जगाये भी | य
 
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पर अब भी बहुत कुछ याद है मुझे

बहुत भुलाना चाहा, बहुत कुछ भुलाया, पर अब भी बहुत कुछ याद है मुझे | वो इश्क की राहों में पहले कदम, उन कदमों पे लङखङाना और संभलना याद है मुझे || वो तेरा नजरे मिलाना और पलकें झुकाना याद है मुझे | वो तेरा सब कुछ समझना और बच के निकलना
 
Gaurav Sangtani
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बात इतनी सी है

जो होना है वो होता है, तेरी मेरी बिसात कुछ भी नहीं. मैं जो यूँ अक्सर उदास रहता हूँ, बात इतनी सी है कि……… बात कुछ भी नहीं. - अज्ञात (कहीं सुना था कभी)
 
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जाते हुए दिन नें

एक क्षणिका….! जाते हुए दिन ने शाम से बस इतना ही कहा ‘अब भी उदास बैठा है वो, न जाने किस गम को दबाए बैठा है वो | उगते हुए सूरज की किरणें, पँछियों की चहचहाहट, खिलते हुए फूल, सुबह की चाय की चुस्की, स्कूल जाते बच्चों का शोर, धान कूटती औरत
 
Gaurav Sangtani
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समझे नहीं जो खामोशी मेरी

समझे नहीं जो खामोशी मेरी, मेरे लब्जों को क्या समझेंगे | बचते रहे उम्र भर साये से मेरे, मेरे जख्मों को क्या समझेंगे | भूल जाना यूँ तो नहीं है, रवायत मोहब्बत की | समझे नहीं जो हालात मेरे, इन रस्मों को क्या समझेंगे | - गौरव संगतानी
 
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जिंदगानी

जिंदगी हर पल बस यही सिखाती है, चलने का नाम ही जिंदगानी है | जो थम गया तो मिट गया, दरिया सिर्फ बहता पानी है || - गौरव संगतानी
 
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मंजिलें भी उसकी थी…!

मंजिलें भी उसकी थी, रास्ता भी उसका था | एक मैं अकेला था, काफिला भी उसका था | साथ साथ चलने की सोच भी उसकी थी, फिर रास्ता बदलने का फैसला भी उसका था | आज क्यों अकेला हूँ, दिल सवाल करता है | लोग तो उसके थे, क्या खुदा भी उसका था…
 
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वो चाहत कहाँ से लाओगे…!

जितना चाहा है तुम्हे…. वो चाहत कहाँ से लाओगे…! चाहत मिल भी गयी तो ये दिल कहाँ से लाओगे..! दिल ढूँढ भी लिया तुमने तो वो इतना जल नही पाएगा, मैं फिर कहता हूँ….. जितना चाहा है तुम्हे कोई चाह नही पाएगा…! - गौरव संगतानी
 
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एक शेर

हमें अश्कों से ज़ख़्मों को धोना नही आता | मिलती है खुशी तो उसे खोना नही आता || सह लेते हैं हर गम हस के , और वो कहते हैं कि हमें रोना नही आता…|| - अग्यात
 
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शाम

शाम होते ही चरागों को बुझा देता हूँ मैं, इक दिल ही काफी है तेरी याद में जल जाने के लिए | -अग्यात
 
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तेरा नाम

नज़्म उलझी हुई है सीने में, मिसरे अटके हुए हैं होठों पर उड़ते-फिरते हैं तितलियों की तरह, लफ्ज़ कागज पे बैठते ही नहीं कब से बैठा हुआ मैं जानम, सादे काग़ज़ पे लिखके नाम तेरा बस तेरा नाम ही मुकम्मल है, इससे बेहतर भी नज़्म क्या होगी……….
 
Gaurav Sangtani
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खुदाई

खुदा हम को ऐसी खुदाई ना दे कि अपने सिवा कुछ दिखाई ना दे ख़तावार समझेगी दुनिया तुझे अब इतनी भी ज़्यादा सफाई ना दे - बशीर बद्र
 
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कुछ शेर धुंधले से….

कुछ शेर धुंधले से…. कहीं सुने थे कभी…. जिन्होने भी लिखे हैं उन्हे सलाम… १. तेरी याद मे जल रहा हूँ मैं, जहाँ तक रोशनी हो… चले आओ.. चले आओ…..! _____________________________________________ २. किस ज़ुबान से करें शिकवा हम उन
 
Gaurav Sangtani
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तेरा ज़िक्र

बस इक झिझक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फसाने में इसी में इश्क़ की क़िस्मत बदल भी सकती थी जो वक़्त बीत गया मुझ को आज़माने में - कैफ़ी आज़मी
 
Gaurav Sangtani
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टूट गया

आज अश्कों का तार टूट गया रिश्ता-ए-इंतज़ार टूट गया यूँ वो ठुकरा के चल दिए गोया इक खिलौना था प्यार टूट गया रोए रह-रह कर हिचकियाँ लेकर साज़-ए-गम बार बार टूट गया ‘सैफ’ क्या चार दिन कि रंजिश से इतनी मुद्दत का प्यार टूट गया - सैफुद्दीन सैफ
 
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मेरा मुक़द्दर….!

रातों को चुपके से कोई साया आता है, हवा का हर झोंका तेरी याद लाता है | कब तक यूँ ही तपड़ता रहूँगा मैं, क्यों हर बार मेरा मुक़द्दर मेरे दर से लौट जाता है || गौरव संगतानी
 
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राज़

पास आकर भी फ़ासले क्यों हैं | राज़ क्या है, समझ मे ये आया || उस को भी याद है कोई अब तक | मैं भी तुमको भुला नही पाया || - जावेद अख़्तर
 
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रोना आया

हम को तो गर्दिश-ए-हालात पे रोना आया रोने वाले तुझे किस बात पे रोना आया कैसे मर-मर के गुज़ारी है तुम्हें क्या मालूम रात भर तारों भरी रात पे रोना आया कितने बेताब थे रिम झिम में पिएँगे लेकिन आई बरसात तो बरसात पे रोना आया कौन रोता है किसी और के गम कि खात
 
Gaurav Sangtani
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तेरा गम

हो गयी है शाम, तेरी याद आ रही है | हर तरफ है धुन्ध, हर आस जा रही है || खो गया है अब तो मेरा खुद का वजूद भी, ना जाने किस लिहाज़ से ये सांस आ रही है|| तेरे दिए गम के साथ ही जिए जा रहा हूँ, कैसे कर लूँ यकीन तेरी तरह छोड़ के ना ज
 
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बदनाम मेरे प्यार का अफ़साना हुआ है…!

बदनाम मेरे प्यार का अफ़साना हुआ है दीवाने भी कहते हैं की दीवाना हुआ है रिश्ता था तभी तो किसी बेदर्द ने तोड़ा अपना था तभी तो कोई बेगाना हुआ है बादल की तरह आ के बरस जाये इक दिन दिल आप के होते हुए विराना हुआ है बजते हैं ख़यालों में तेरी याद के घुँगरू कु
 
Gaurav Sangtani
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कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं….

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं, तुम कह देना कोई खास नही……. एक दोस्त है कच्चा पक्का सा, एक झूठ है आधा सच्चा सा….. जज़्बाद को ढकके एक परदा बस, एक बहाना अच्छा सा….. जीवन का ऐसा साथी है, जो दूर ना होके पास नही……. कोई तुमसे
 
Gaurav Sangtani
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आख़िर क्यूँ..

कितनी दफा हम पूछते हैं न….. आख़िर क्यूँ..??? कुछ बातों का कोई कारण नही होता कोई अर्थ नहीं होता कोई तर्क नहीं होता आप स्वीकारें न स्वीकारें…. कोई फर्क नही होता….!!! कुछ सवालों का कोई जवाब नही होता कोई शुरुआत नही होती कोई अंत नहीं होत
 
Gaurav Sangtani
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कुछ प्यारे एस. एम. एस (लघु संदेश सेवा)

गीले काग़ज़ क़ी तरह है ज़िंदगी अपनी,कोई जलाता भी नहीं और कोई बुझाता भी नहीं |इस कदर अकेले हो गये हैं आज कल,कोई सताता भी नहीं और कोई मनाता भी नहीं ||___________________________________आँखो मे महफूज़ रखना सितारों को,राह मे कहीं ना कहीं र
 
Gaurav Sangtani
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क्या लिखूं….

क्या लिखूं…. पैगाम लिखूं… तुझे जज़्बात लिखूं… या अपने ये हालात लिखूं…. क्या लिखूं…. रातें लिखूं… वो बातें लिखूं… या ठहरी हुई मुलाक़ातें लिखूं… क्या लिखूं…. जीत लिखूं… इसे हार लिखूं….
 
Gaurav Sangtani