दोहे जैसा कुछ
1-दिल की बस्ती छोड़कर, धूप गयी परदेसप्रीतम फिर भी आयेंगे , गोरी धोये केश 2- मैंने दिल को नाप कर , आज सिलाई सांसधड़कन पर कसती जाये , धक् धक् बोले मांस 3-चलते चलते राह में यूँ भी मिलना मीत आये जैसे होंठ पर , भूला बिसरा गीत 4-रहिमन धागा प्रेम का ,उलझा बन के
Apr 15 2010 02:44 PM



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