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दोहे जैसा कुछ

1-दिल की बस्ती छोड़कर, धूप गयी परदेसप्रीतम फिर भी आयेंगे , गोरी धोये केश 2- मैंने दिल को नाप कर , आज सिलाई सांसधड़कन पर कसती जाये , धक् धक् बोले मांस 3-चलते चलते राह में यूँ भी मिलना मीत आये जैसे होंठ पर , भूला बिसरा गीत 4-रहिमन धागा प्रेम का ,उलझा बन के
 
स्वप्निल कुमार 'आतिश'
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बुरा न मानो होली है

उन्हें सख्त परहेज है हम को भाये रंग वो भी हमसे तंग हैं हम भी उनसे तंग कैसे होली खेलिए सुंदरियों के संग हम हाथी की चाल हैं वो हिरनी के ढंग बालों में बेकार अब महँगा काला रंग सांस फूल चुगली करे कैसे लगिए यंग मनमोहन
 
jogeshwar garg
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भर्तृहरि नीति शतक-धन की ऊष्मा से रहित मनुष्य क्या रह जाता है (heat of money-hindu sandesh)

भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि  —————————————– तानींद्रियाण्यविकलानि तदेव नाम सा बुद्धिरप्रतिहता वचनं तदेव। अर्थोष्मणा विरहितः पुरुषः क्षपोन सोऽष्यन्य एव भवतीति
 
दीपक भारतदीप
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इंग्लिश में दोहे

मित्रों !आपने दोहे बहुत पढ़े होंगे। हिन्दी में, ब्रज में, राजस्थानी में, गुजराती में तथा अन्य भाषाओं में "दोहा" बहुत ही लोकप्रिय छंद है। दोहे में चार चरण होते हैं। पहले और तीसरे चरण में १३ तथा दूसरे और चौथे चरण में ११ मात्राएँ होती हैं। दूसरे और चौथे चरण
 
jogeshwar garg
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दुर्गा दास राठोड

मारवाड़ रियासत के सिरमौर प्रखर स्वामी-भक्त अजेय योद्धा वीर शिरोमणी दुर्गा दास राठोड की आज ३७१ वीं जयंती है। उनके सम्मान में प्रस्तुत है काव्यांजलि: कुलदीपक करनोत के, आसकरण की आस।श्रावण शुक्ला चतुर्दशी, प्रकटे दुर्गा दास।वीरगति जसवंत की, जब काबुल के
 
jogeshwar garg
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