tak dhinadin
किसे फिक्र है यहां इस गंदे पानी कीकिसे फिक्र है यहां इस बदबू देती भैंस कीमेरे लिए तो ये भैंस किसी नाव से कम नहींजिस पे लेटकर मैं आसमान से तारे तोडऩे के ख्वाब बुन रहा हूंरोशनी गर खुदा को हो मंजूरआंधियों में भी चराग जलते हैंइस दौड़ को तो मुझे जीतना ही
Feb 06 2010 03:01 PM



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