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प्रवासी साहित्यकारों के प्रतिनिधि डा॰ दाऊजी गुप्त मुंबई में
17 अप्रैल 2010 की बात है जब देवी नागरानी जी के मोबाइल फोन की घंटी बजी- "मैं दाऊजी गुप्त बोल रहा हूँ लखनऊ से, कल मुंबई पहुँच रहा हूँ।" देवी जी ने क्षण भर को सोचा और ख़ुशी से बोलीं- "आपका स्वागत है हमारी महानगरी में।" और बातों के सिलसिले में यह तय हुआ कि
Apr 27 2010 11:24 AM



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