पसंद करें
0
नापसंद करें

माँ के लिए एक ख़त

माँ! कहने को इस शहर से रिश्तासाल भर का हो गया हैअब तक तो इसे चलना सीख लेना थापर जाने क्यूँ माँइसे बीमारी लग गई है, अकेलेपन कीऔर ये रिश्ता, अपाहिज हो गया हैसोचा था इस शहर के रिश्ते से नए रिश्ते मिलेंगे, मगरयहाँ रिश्ते मोबाइल में बंद रहते हैंएसएसएस पर पलते
 
नियंत्रक । Admin
टैग: deepali aab
पसंद करें
0
नापसंद करें

देर तलक क्यूँ रोते हैं शजर

तुमकिसी पानी की लहर से आयेमेरा रोम रोमअपने नूर से भिगो गएमैं तन्हा, अब तलकतेरी आमद को महसूस कर रही हूँजबकि तुम कब के जा चुकेदर्द बूँद बूँद कर के टूटता हैतो एहसास होता हैबारिश के जाने के बाद देर तलकक्यूँ रोते हैं शजर!!कवयित्री- दीपाली आब
 
नियंत्रक । Admin
टैग: deepali aab
पसंद करें
0
नापसंद करें

कुछ कुछ सबको मिलता है- गुनगुनाते लम्हे का नया एपीसोड

आज है माह का तीसरा मंगलवार और मौका है गुनगुनाते लम्हे का। इस कार्यक्रम के माध्यम से हम किसी एक कहानी को गीतों की चाश्‍नी में डुबोते हैं ताकि आप उसे पूरा रस लेकर सुन सकें। इस बार की कहानी थोड़ी लम्बी है। लेकिन कहानी की लेखिका दीपाली आब का मानना है कि आप
 
नियंत्रक । Admin
टैग: deepali aab