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रहस्य-हिन्दी शायरी

दौलत, शौहरत और ताकत का नशा भले चंगे को रास्ते से भटका देता है, शिखर पर पहुंचे हैं जो दरियादिल उनसे जज़्बाती हमदर्दी का उम्मीद करना बेकार है, क्योंकि हो जाते हैं उनके सपने पूरे पर दर्द के अहसास मर जाते हैं। हाथ फैलायें खड़े हैं नीचे उनसे दया की आशा करने
 
दीपक भारतदीप
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अपनी जिंदगी-हिन्दी शायरी (apni zindagi-hindi shayari)

यकीन करो दूसरों के अधिकार और उद्धार की लड़ाई लड़ने की बात जो करते हैं वह संजीदा नहीं है, क्योंकि उधार के ख्याल पर गुजारी है उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी। सारी उम्र लगा दी लोगों का भला करते हुए पर एक बंदा भी वह खुश नहीं दिखा सकते, ज़माने के कमजोर मोहरे ही सोच
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वफदारी के दलाल-हिन्दी शायरी

हुक्मरानों ने तय कर दी सरहदें आम इंसानों का रास्ता रोकने के लिये, उनकी तन्ख्वाहों पर पलने वाले पहरेदार खड़े हैं आजादी से चलने वालों को टोकने के लिये। सिंहासन पर बैठने वाले चलते हैं उड़न खटोले में सांस लेते हैं मातहतों के टोले में, बेईमानों और दहशतगर्दों का
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विकासवादी और पुरातनवादी-हिन्दी कविता

स्त्री का भला करेंगे, बच्चों को खुश करने के दावें भरेंगे, वृद्धों का उद्धार करेंगे, मजदूरों को न्याय देंगे, गरीब को करेंगे अमीर, और लाचार का सहारा बनेंगे, ऐसे दावे धोखा है, बेईमानी का खोखा है। समाज को एक जैसा बनाने की कोशिश करने वाले विकासवादी अक्लमंद
 
दीपक भारतदीप
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हिन्दू धर्म संदेश-अज्ञानी करते हैं स्वर्ग की कल्पना

भर्तृहरि महाराज के अनुसार  ————————- स्वपरप्रतारकोऽसौ निन्दति योऽलीपण्डितो युवतीः। यस्मात्तपसोऽपि फलं स्वर्गस्तस्यापि फलं तथाप्सरसः।। हिन्दी में भावार्थ-शास्त्रों का अध्ययन करने वाले कुछ अल्पज्ञानी
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हिन्दू धर्म संदेश-पैसा कमाने से कभी फुर्सत नहीं मिल सकती

किं तया क्रियते लक्ष्म्या या वधूरिव केवला। या तु वेश्येव सा मान्या पथिकैरपि भुज्यते।। हिन्दी में भावार्थ-उस संपत्ति से क्या लाभ जो केवल घर की अपने ही उपयोग में आती हो। जिसका पथिक तथा अन्य लोग उपयोग करें वही संपत्ति श्रेष्ठ है। धनेषु जीवतिव्येषु स्त्रीषु
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खामोश तूफान-हिन्दी शायरी (khamosh toofan-hindi shayari)

दीवार के उस तरफ वह आग की तरह उफन रहे हैं यह सोचकर कि इस पार पहुंचते ही तिनके को जला डालेंगे। अंदाज नहीं उनको इस बात का कि यहां भी कोई खामोश तूफान सांस ले रहा है यह ख्याल करते हुए कि हवाओं का रुख पलटा है कई बार इस बार आग को भी [...]
 
दीपक भारतदीप
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चमन में अमन है-हिन्दी व्यंग्य कविता

दहशतगर्द घूम रहे आजाद उनकी गोलियों से सभी तो नहीं मर गये फिर भी जिंदा हैं ढेर सारे लोग इसलिये मान लो चमन में अमन है। खेल के नाम पर चल रहा जुआ जिनकी मर्जी है वही तो खेल रहे हैं बाकी लोग तो बैठे हैं चैन से इसलिये मान लो चमन में अमन है। [...]
 
दीपक भारतदीप
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चाणक्य दर्शन-पैसा जोड़ने से ही शांति नहीं मिलती

धनेषु जीवतिव्येषु स्त्रीषु चाहारकर्मसु। अतृप्तः प्राणिनः सर्वे याता यास्यन्ति यान्ति च।। हिन्दी में भावार्थ- धन और भोजन के सेवन तथा स्त्री के विषयों में लिप्त रहकर भी अनेक मनुष्य अतृप्त रह गए, रह जाते हैं और रह जायेंगे। किं तया क्रियते लक्ष्म्या या
 
दीपक भारतदीप
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यकीन करना मुश्किल-हिन्दी व्यंग्य कविता

खबरों से यकीन यूं उठ गया है क्योंकि वह शब्द बदल सामने आती रहीं। कहीं चेहरे बदले तो कहीं चालें पर चरित्र पुराना ही दिखाती रहीं। नतीजे पर नहीं पहुंचा कोई मुद्दा पर खबरें बरसों तक चलती रहीं, कहीं बाप की जगह बेटे का नाम लिखा जाने लगा कहीं बेटियों के नाम भरती
 
दीपक भारतदीप
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फरिश्तों की दरबार-हिन्दी शायरी

फरिश्तों की दरबार में क्यों हाजिरी लगाने जाते हो, हो सकता है वहां रोज सुबह फर्श धोया जाता हो रंगीन रात के जश्न की धूल धोने के लिये तुम सफेद चेहरों की काली नीयत क्यों नहीं समझ पाते हो। पत्थर के बुतों की तरह खड़े हैं फरिश्ते वहां सांसें लेने के लिये नहीं
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जुबां का रिश्ता-हिन्दी शायरी

आखों से अब अश्क नहीं बहते क्योंकि दर्द का दरिया सूख गया है, जहां दिल लगाया दिल्लगी समझ जमाने ने मुंह फेरा अब बयां नहीं करते किसी से अपने हाल अपनी ही हकीकतों से हमारी जुबां का रिश्ता टूट गया है। ———- उनकी प्यार भरी निगाहें देखकर हमने
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कर्जे और किश्तों में जिंदगी-आलेख और कविता (loan and lifr-hindi article and poem)

आजकल कर्जे लेकर सामान खरीदने का एक रिवाज चल रहा है। अमीर न होने पर भी वैसा दिखने वालों की चाहत पूरा करना आसान हो गया है। किश्तों पर अपने लक्ष्य की किश्ती चलाना आसान लगता है पर उसे निभाना उतना सहज नहीं रह जाता। एक आम मध्यम या निम्न वर्गीय व्यक्ति के लिये
 
दीपक भारतदीप
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अंतर्जाल पर दूसरे की लोकप्रियता का लाभ उठाने के प्रयास-हिन्दी लेख

तीन वर्ष से जारी हमारी निजी ‘चिट्ठाचर्चा’ में पहली बार दो ऐसे शब्दों से सामना हुआ जिनके अर्थ और भाव से हम आज तक परिचित नहीं थे। वह हैं ‘साइबर स्कवैटिंग’ और ‘टाइपो स्क्वैटिंग’। मुश्किल तो यही है कि भाई लोग अंग्रेजी हिज्जे नहीं लिखते जिससे उनका शुद्ध
 
दीपक भारतदीप
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शब्दों की प्रेरणा-हिन्दी व्यंग्य कवितायें

दिन भर वह दोनों ज्ञानी अपने शब्दों की प्रेरणा से लोगों को लड़ाने के लिये झुंडों में बांट रहे थे, रात को लूट में मिले सामान में अपना अपना हिस्सा ईमानदारी से छांट रहे थे। ——- शब्द रट लेते हैं किताबों से, सुनाते हैं उनको हादसों के हिसाबों से, पर
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रहीम दर्शन-भक्ति न करने पर विषय घेर लेते हैं

कविवर रहीम कहते है कि —————– रहिमन राम न उर धरै, रहत विषय लपटाय पसु खर खात सवाद सों, गुर बुलियाए खाय भगवान राम को हृदय में धारण करने की बजाय लोग भोग और विलास में डूबे रहते है। पहले तो अपनी जीभ के स्वाद के लिए जानवरों
 
दीपक भारतदीप
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श्रीगुरुवाणी-किसी से जाति या जन्म के बारे में न पूछें

संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior http://deepkraj.blogspot.com ‘जाति जनमु नह पूछीअै, सच घर लेहु बताई। सा जाति सा पति है, जेहे करम होई।।’ हिन्दी में भावार्थ-श्री गुरुग्रंथ साहिब के अनुसार किसी की जाति या जन्म के बारे में न पूछें। सभी एक ही
 
दीपक भारतदीप
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झगड़ा भी एक शय की तरह बिकता-हिन्दी व्यंग्य कविता

झगड़ा भी एक शय है जो बड़ा पाव की तरह बाजार में बिकती। अमन के आदी लोगों में चैन कहां कहीं शोर देखने की चाहत उनमें दिखती। इसलिये लिख वह चीज जो बाजार में बड़े दाम पर बिकती। अठखेलियां करती कवितायें मन भाती कहानियां और अमन के गीत लिखना है तो अपने दिल के सुकूल के
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हैती का भूंकप, ज्योतिष,पूंजीवाद और साम्यवाद-हिन्दी लेख

हैती में भूकंप, ज्योतिष, पूंजीवाद और समाजवाद जैसे विषयों में क्या साम्यता है। अगर चारों को किसी एक ही पाठ में लिखना चाहेंगे तो सब गड्डमड्ड हो जायेगा। इसका कारण यह है कि भूकंप का ज्योतिष से संबंध जुड़ सकता है तो पूंजीवाद और समाजवाद को भी एक साथ रखकर लिखा
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सांसरिक चतुराई तो हर कोई सीख लेता है-हिन्दू धर्म सन्देश

लिखना पढ़ना चातुरी, यह संसारी जेव। जिस पढ़ने सों पाइये, पढ़ना किसी न सेव। संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते है कि लिखना, पढ़ना चतुराई करना यह तो संसार की सामन्य बातें हैं। जिस परमात्मा का नाम पढ़कर समझना चाहिये उसे कोई नहीं मानता। ज्ञानी ज्ञाता बहु मिले, पण्डित कवी
 
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स्वर्ग एक ख्याल है-हिन्दी शायरी

स्वर्ग की परियां किसने देखी स्वयं जाकर बस एक पुराना ख्याल है। धरती पर जो मिल सकते हैं, तमाम तरह के सामान ऊपर और चमकदार होंगे यह भी एक पुराना ख्याल है। मिल भी जायें तो क्या सुगंध का मजा लेने के लिये नाक भी होगी, मधुर स्वर सुनने के लिये क्या यह कान भी
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योग केवल सांस लेने की क्रिया नहीं है-आलेख (yog aur asan-hindi lekh)

वह योगासन शिक्षक हैं न कि एक संपूर्ण योग गुरु-कम से कम योग के संबंध में उनका से कथन कि ‘योग तो एक सांस लेने की क्रिया  है’ यही समझा में आ सकता है। जिस भारतीय योग को हम जानते हैं उसके आठ भेद हैं-यम,नियम,आसन,प्राणायाम,प्रत्यहार,धारणा,ध्यान
 
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आंसुओं का व्यापार-हिन्दी शायरी

हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। शायद लोग दिमाग से सोचते हैं इसलिये हमदर्दी के शब्द जल्दी ढूंढ लेते दिल तक नहीं पहुंचता दूसरे का दर्द कर लेते हैं दिखावे में कमाई। नहीं करना सीखा
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ज्योतिष, नववर्ष और सितारे- नये वर्ष पर विशेष लेख (hindi satire on new year 2010)

धरती के सितारों को अपने सितारों की फिक्र नहीं जितनी कि उनके चेहरे, अदायें और मुद्रायें बेचने वालों को है। धरती के बाकी हिस्से का नहीं पता पर भारतीय धरती के सितारे तो दो ही बस्तियों में बसते हैं-एक है क्रिकेट और दूसरी है फिल्म। यही कारण है कि टीवी चैनल
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नये वर्ष का कबाड़ा-हिन्दी लघु व्यंग कथा (new year after on day-hindi satire

 वह दोनों लड़के हमेशा की तरह उस कालोनी में घर से बाहर पड़े कूड़े और और चौराहे पर रखे कूड़ेदानों से बेचने लायक कबाड़ छांट रहे थे।  पास से जाते हुए दो लोगों में से किसी एक को उन्होंने कहते सुना कि‘ कल से नया वर्ष 2010 लग रहा है।  आज पुराने वर्ष
 
दीपक भारतदीप
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इंटरनेट पर लिखते और देखते बीत गये तीन वर्ष-हिन्दी संपादकीय (hindi editorial three year)

अंतर्जाल पर लिखते हुए तीन वर्ष का समय हो गया। कहना कठिन है कि अपना उद्देश्य कहां तक प्राप्त किया। वैसे ही लिखने को लेकर अपनी सफलता या असफलता का विचार नहीं किया। न ही इस बात पर विचार किया कितने लोगों ने पढ़ा? अलबत्ता अपने जीवन में लिखना शुरु करने से आज तक
 
दीपक भारतदीप
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इशारे-हिन्दी व्यंग्य कविता (ishare-hindi satire poem)

तैश में आकर तांडव नृत्य मत करना चक्षु होते हुए भी दृष्टिहीन जीभ होते हुए भी गूंगे कान होते हुए भी बहरे यह लोग इशारे से तुम्हें उकसा रहे रहे हैं। जब तुम खो बैठोगे अपने होश, तब यह वातानुकूलित कमरों में बैठकर तमाशाबीन बन जायेंगे तुम्हें एक पुतले की तरह अपने
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तयशुदा लड़ाई-हिन्दी लघुकथा (fix religion war-hindi short story)

वह डंडा लेकर उस मैदान में लड़ने पहुंचे। यह मैदान ‘धर्मकुश्ती’ के लिये विख्यात था। मैदान के मध्य में उन दोनों ने अपने अपने धर्म का नाम लेकर लड़ाई शुरु की। पहले एक दूसरे पर डंडे से प्रहार करते-साथ में अपने धर्म की जय भी बोलते जाते। डंडे से डंडे टकराते। वह
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फरिश्तों का सम्मेलन -हिन्दी व्यंग्य कविता (sammelan-hindi satire poem

अब संभव नहीं है कोई कर सके सागर का मंथन या डाले हवाओं पर बंधन। इसलिये नये फरिश्ते इस दुनियां के रोकना चाहते हैं जहरीली गैसों का उत्सर्जन जिसे छोड़ते जा रहे हैं खुद समंदर से अधिक खारे विष से अधिक विषैले नीम से अधिक कसैले अपनी उन फरिश्तों ने महफिल सजाने के
 
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शब्दों पर नियंत्रण-हिन्दी व्यंग्य (control of word-hindi satire

एक टीवी चैनल को उसके मनोरंजक कार्यक्रम में अभद्र और अश्लील शब्दों के प्रयोग पर आखिर नोटिस थमा दिया गया है। हो सकता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के कुछ समर्थक इस पर नाराज हों पर यह एक जरूरी कदम है। दरअसल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई रोक नहीं होना चाहिये पर
 
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हिन्दू धर्म सन्देश-बड़े लोगों का मुख ताकने वालों को धिक्कार (hindu dharam sandesh-bade logon ko mukh n tako)

मृतिपण्डो जलरेखया वलचितः सर्वोऽप्ययं न नन्वणुः स्वांशीकृत्य स एवं संगरशतै राज्ञां गणैर्भुज्यते। ते दद्युर्ददतोऽथवा किमपरं क्षंुद्रदरिद्रं भृशं धिग्धिक्तान्युरुषाधमान्धनकणान् वांछन्ति तेभ्योऽपि ये।। हिन्दी में भावार्थ-यह पृथ्वी पानी से चारों तरफ घिरा
 
दीपक भारतदीप
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हिन्दू धर्म संदेश-बड़ा वही है जो गरीब पर कृपा करे (garib par kripa karen-hindu dharm sandesh)

जे गरीब पर हित करै, ते रहीम बड़लोग कहाँ सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग कविवर रहीम कहते हैं जो छोटी और गरीब लोगों का कल्याण करें वही बडे लोग कहलाते हैं। कहाँ सुदामा गरीब थे पर भगवान् कृष्ण ने उनका कल्याण किया। आज के संदर्भ में व्याख्या- आपने देखा होगा कि
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हिन्दू धर्म संदेश-सदगुणों से ही आयु बढ़ती है (sadgun aur ayu-hindu dharm sandesh)

अपनीतं सुनीतेन योऽयं प्रत्यानिनीषते। मतिमास्थाय सुदृढां तदकापुरुषव्रतम्।। हिंदी में भावार्थ-जो अन्याय के कारण नष्ट हुए धन को अपनी स्थिर बुद्धि का आश्रय लेकर पवित्र नीति से वापस प्राप्त करने का संकल्प लेता है वह वीरता का आचरण करता है। मार्दव
 
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हमदर्दी जताने में कमाई-हिन्दी क्षणिका

हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। शायद लोग दिमाग से सोचते हैं इसलिये हमदर्दी के शब्द जल्दी ढूंढ लेते दिल तक नहीं पहुंचता दूसरे का दर्द कर लेते हैं दिखावे में कमाई। नहीं करना सीखा
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विदुर नीति-अर्थ प्राप्ति के लिए धर्म का पालन करें (arth aur dharm-hindu adhyamik sandesh)

यस्यात्मा विरतः पापाद कल्याणे च निवेशितः। तेन स्र्वमिदं बुद्धम् प्रकृतिर्विकृतिश्चय वा।। हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर कहते हैं कि जिसकी बुद्धि पाप से परे होकर कल्याण के मार्ग पर आ जाये वह इस संसार में हर वस्तु कि प्रकृतियों और विकृतियों को अच्छी
 
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भर्तृहरि नीति शतक-भक्ति को धंधे की तरह न करें (bhakti ko dhandha n samjhen-hindu sandesh)

भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————————— कि वेदैः स्मृतिभिः पुराणपठनैः शास्त्रेर्महाविस्तजैः स्वर्गग्रामकुटीनिवासफलदैः कर्मक्रियाविभ्रमैः। मुक्त्वैकं भवदुःख भाररचना विध्वंसकालानलं
 
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शरीर और मन से विकार निकालने का सबसे अच्छा उपाय है योग साधना (yogsadhna-hindi lekh)

अक्सर लोग योग साधना को केवल योगासन तक ही सीमित मानकर उसका विचार करते हैं। जबकि इसके आठ अंग हैं। योगांगानुष्ठानादशुद्धिये ज्ञानदीप्तिराविवेकख्यातेः।। हिंदी में भावार्थ-योग के आठ अंग-यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। इसका आशय यही
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फरिश्ते होने का अहसास जताते-व्यंग्य कविता

किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी हंसना कभी उसमें बहना कोई फरिश्ते आकर नहीं बताते। ओ किताब हाथ में थमाकर लोगों को बहलाने वालों! शब्द दुनियां को सजाते हैं पर खुद कुछ नहीं बनाते कभी खुशी और
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जमाने की चाहत-हास्य हिंदी कविता

सुनते हैं मरते समय रावण ने राम का नाम जपा इसलिये पुण्य कमाने के साथ स्वर्ग और अमरत्व का वरदान पाया। उसके भक्त भी लेते राम का नाम पुण्य कमाने के वास्ते, हृदय में तो बसा है सभी के सुंदर नारियों को पाने का सपना चाहते सभी मायावी हो महल अपना चलते दौलत के साथ
 
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सामूहिक ठगी का मतलब-व्यंग्य चिंत्तन (samuhik thagi ka matlab-vyangya lekh)

एक के बाद एक सामूहिक ठगी की तीन वारदातें टीवी चैनलों और समाचार पत्रों की सुर्खियां बन गयी हैं। आप यह कहेंगे कि ठगी की हजारों वारदातें इस देश में ं होती हैं इसमें खास क्या है? याद रखिये यह सामूहिक ठगी की वारदातें हैं और कोई एक व्यक्ति को ठग कर भागने [...]