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खिज़ां को बुलाने चलो

हर फ्रिक्र-ए-ज़हां को दिल से भुलाने चलो । चलो ख़्वाब में सूकून की नींद सोने चलो । खिज़ा में भी रंगो को याद रखना सदा , मौसम-ए-ग़म में भी , खुशी को पाने चलो । राहतों के शहर की तलाश में मर ना जाना , आफतों के जहां में ही , घर बसाने चलो । खिज़ा के बिन बहार क
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पागल दिल था

कल तुम गुजर रहे थे , या कोई ग़ज़ल गुनगुना रहा था …. कल आहट थी कोई पहचानी , या कोई दरवाजे पर आ आ के जा रा था …. कल चाँद था फलक पर , या तेरा चेहरा मुस्कुरा रहा था …. मैने बहुत रोका मगर , वो ना था ना नज़र आरहा था …. पागल दिल था श
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पागल दिल था

कल तुम गुजर रहे थे , या कोई ग़ज़ल गुनगुना रहा था …. कल आहट थी कोई पहचानी , या कोई दरवाजे पर आ आ के जा रा था …. कल चाँद था फलक पर , या तेरा चेहरा मुस्कुरा रहा था …. मैने बहुत रोका मगर , वो ना था ना नज़र आरहा था …. पागल दिल था श
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अन्धेरी रात उसने भी

परिन्दो को कभी क्या , माँ ने उड़ना सिखाया था , उन्हे तो बस किसी शाख से गिरकर बताया था । तुम्ह भी चुप चाप चले आये हो महफ़िल से , तुम्हे भी क्या उसी ने जाम पिलाया था । हमे अब गम से दहशन नहीं कोई, मिला के दर्द ,जाम खुशी का पिलाया था । शहर की गलियों के [...]
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क्या करूँ

दिल से तेरा ख्याल ना जाये तो क्या करूँ । तू ही बता तेरी याद आये तो क्या करूँ । हसरत है कि तुझे इक नजर देखूँ , किस्मत अगर ना दिखाये तो क्या करूँ । चारों तरफ़ तू ही नजर आये तो क्या करूँ , हवाये तेरी आवाज सुनाये तो क्या करूँ । मैं सर झुकाता हूँ सजदे में
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गुनाह होते हुऎ देखा

मैने खुद को ही तबाह होते हुऎ देखा , जर्रे जर्रे में गुनाह होते हुऎ देखा । रग रग में लहू बन के जो दौड़ता था, मैनें उसको भी स्याह होते हुऎ देखा । उचाँईयों से ना मेरा जिक्र करो , खुद को गर्दिश में पनाह होते हुऎ देखा । जो समझता था मुझे मुझसे ज्यादा , मैने
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जिंदगी कई बार

जिंदगी कई बार हमें अंधेरे में लाके छोड़ देती है | दर्द में बेहाल बेबस छोड़ देती है ना मैं नज़र आता हूँ ना रास्ता नजर आता है दूर तक बस अँधेरा नज़र आता है तड़पता हूँ रोता [...]
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कल

कल याद मेरी उसे रुला आई है । कल बात मेरी बिगड़ती बना आई है । कल शाम सुबह सा मन्ज़र कर , कल रात मेरी पतझड़ बहार आई है । कल क्या था कुछ खास नहीं , कल शाख मेरी लहरा लहरा आई है । कल चुप चाप दबे पावं चला आया , कल आवाज़ मेरी वहाँ से आई है । कल-कल [...]
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हौसलों के देश में

एक कदम ही रखा ,हो खडा़ महल गया , दिल मेरा सम्भल गया , टूट कर सवरं गया , हौसलों के देश में , हौसलों के देश में । देश है ये इक नया , इक अलग जहाँन है , हारता नहीं कोई , जीत ही मुकाम है , हौसलों के देश में , हौसलों के देश में । ना कहीं [...]
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कल

कल याद मेरी उसे रुला आई है । कल बात मेरी बिगड़ती बना आई है । कल शाम सुबह सा मन्ज़र कर , कल रात मेरी पतझड़ बहार आई है । कल क्या था कुछ खास नहीं , कल शाख मेरी लहरा लहरा आई है । कल चुप चाप दबे पावं चला आया , कल आवाज़ मेरी वहाँ से आई है । कल-कल [...]