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बुरे आदमी से संगत सांप पालने से अधिक दुःखदायी-हिन्दी संदेश

संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior http://rajlekh.blogspot.com ____________________________ नीति विशारद चाणक्य महाराज का कहना है कि क्षान्तिश्चत्कवचेन किं किमनिरभिः क्रोधीऽस्ति चेद्दिहिनां ज्ञातिश्चयेदनलेन किं यदि सहृदद्दिव्यौषधं किं फलम्। किं
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पेशेवर बौद्धिक विलासी- हिन्दी आलेख (peshevar buddhi vilasi)

हिटलर तानाशाह पर उसने जर्मनी पर राज्य किया। कहते हैं कि वह बहुत अत्याचारी था पर इसका मतलब यह नहीं है कि उसने हर जर्मनी नागरिक का मार दिया। उसके समय में कुछ सामान्य नागरिक असंतुष्ट होंगे तो तो कुछ संतुष्ट भी रहेंगे। कहने का मतलब यह कि वह एक तानाशाह पर
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भर्तृहरि नीति शतक-भक्ति को धंधे की तरह न करें (bhakti ko dhandha n samjhen-hindu sandesh)

भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————————— कि वेदैः स्मृतिभिः पुराणपठनैः शास्त्रेर्महाविस्तजैः स्वर्गग्रामकुटीनिवासफलदैः कर्मक्रियाविभ्रमैः। मुक्त्वैकं भवदुःख भाररचना विध्वंसकालानलं
 
दीपक भारतदीप
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चाणक्य नीति-कुविचारी नारी से तो कोई साथ न हो अच्छा (chankya niti-kuvichari nari ka sath

नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि —————————– वरं न राज्यं कुराजराज्यं वरं न मित्रं न कुमित्रमित्रम्। वरं न शिष्यो कुशिष्यशिष्यो वरं न दारा न कुदारदारा।। हिन्दी में भावार्थ-अयोग्य राजा के
 
दीपक भारतदीप
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इसलिये सोचना ही बंद-आलेख (mor thinking is not good-hindi lekh)

अखबार में खबर छपी है कि ‘ब्रिटेन ने माना है कि तेल के व्यापार की वजह से बम विस्फोट के एक आरोपी को छोड़ना पड़ा-यह आरोपी रिहा होकर मध्य एशियाई देश में पहुंच गया जहां उसका भव्य स्वागत हुआ। इधर टीवी पर एक खबर देखी कि पड़ौसी देश हमारे देश में भीड़ में आधुनिक
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जिंदादिल-हिंदी शायरी (jindadil-hindi shayri)

कभी कोई आंखें कातर भाव से तुम्हारी तरफ ताकती हैं क्या उन पर रहम खाते हो? उठते नहीं हाथ मांगने के लिये पर उनकी छोटी चाहतें तुम्हारे सामने खड़ी होती हंै क्या उनको पूरा कर पाते हो? उठा रहे हैं बरसों से जो कंधे जमाने का बोझ क्या उनकी पीठ सहलाते हो? कोई थक गया
 
दीपक भारतदीप
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ब्लोगिंग (ग़ालिब स्टाइल)

हर एक बात पे कहते हो तुम कही क्या है? तुम ही कहो कि ये अंदाज़-ए-टिप्पणी क्या है? कहीं भी दौड़ते चिट्ठे में हम नहीं शामिल, जब गूगल ही में न मिले, तो फिर कड़ी क्या है? (kadi=link) चिपक रहे है हर एक पोस्ट पे कमेन्ट कई , बला से मेरी फिर गलत क्या और सही क्
 
दर्पण साह 'दर्शन'
टैग: darshan