darkness
बादल इतराते है कि धक् ही लिया सूरज को मैंनेऔर सूरज है कि हार मानने को तैयार नहीं बुरे पल में भी वो रौशनी देना नहीं भूलता देखो! फिर से सूरज कि चमक दिखने लगी है फिर से बादल का दौर ख़त्म हो रहा है हर कदम पे सोचता हूँ थक गया हूँ मैंपर मूढ़ के देखता हूँ कहा
Jan 15 2010 04:07 PM



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