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दलित विमर्श के उपयोगी लेख: तद्भव पत्रिका के दलित विशेषांक से साभार

"वह समाज मरा हुआ है जिसका अपना साहित्य नहीं है, साहित्य ही समाज को जिन्दा रखता है" -चन्द्रिका प्रसाद जिज्ञासुप्रिय प्रबुद्ध जन,इस पोस्ट में दलित विमर्श से सम्बन्धी कुछ लेखों एवं आलेखों का संग्रह दिया जा रहा है जिसे तद्भव पत्रिका के दलित विशेषांक में
 
Kartar Singh Siddharth
टैग: dalit sahitya