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निर्माण कृति का

क्यों निर्माण करना चाहता हूँ उस कृति का जो मुस्कुराये खिलखिलाये प्रकृति के साथ हर कदम हो पूर्ण यौवन का कदम चले तो द्वार खुलें प्रगति के रुकना भी हो एक विशेष अनुभूति से परिपूर्ण मैं जानता हूँ मजबूर कर दिया जाऊँगा इन्ही कुंठाओं में जीने के लिये जो मैने खुद
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निर्माण

मैं कह देता हूँ अपनी बात । जब भी मन करता है कह देता हूँ ।   मैं नहीं जानता कि तुम तक पहुँच भी पाती है मेरी आवाज या नहीं  । फिर भी चुप नहीं रह पाता मैं ।   मुझे पता है कि मेरी आवाज बहुत धीमी है । मुझे पता है कि जब भी बोलता हूँ शब्द लड़खड़
 
चंदन कुमार झा
टैग: creation
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Gayatri Chakravorty Spivak । गायत्री चक्रवर्ती स्पिवाक

गायत्री चक्रवर्ती स्पिवाक (Gayatri Chakravorty Spivak) को उत्तर-उपनिवेशवादी सिद्धान्त के क्षेत्र में उनके स्थायी योगदान के लिये जाना जाता है । उनकी आलोचनात्मक कृतियों में अनेकों लेख, पुस्तकें, साक्षात्कार और अनुवाद सम्मिलित हैं, जिनका क्षेत्र उत्तर-स
 
हिमांशु । Himanshu