चंद मुक्तक -संजीव 'सलिल'
चंद मुक्तकसंजीव 'सलिल'**कलम तलवार से ज्यादा, कहा सच वार करती है.जुबां नारी की लेकिन सबसे ज्यादा धार धरती है.महाभारत कराया द्रौपदी के व्यंग बाणों ने-नयन के तीर छेदें तो न दिल की हार खलती है..*कलम नीलाम होती रोज ही अखबार में देखो.खबर बेची-खरीदी जा रही
Jun 14 2010 10:13 AM



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