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Communalism and Virus

I do not remember whether I wrote it or got it from somewhere.It was lying in my Hard Disk,what a waste. So sharing it.Computer Virus and Communalismसाम्प्रदायिकता भी Computer Virus की भांति समाज के चाहे अनचाहे,जाने अनजाने समाज में घर करती जा रही है।
 
kuldip
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कुँवरनारायण को ज्ञानपीठ मिलने की खुशी में उनकी चार कवितायें

जल्दी में प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी अगर समझने की उतनी ही बड़ी जल्दी में नहीं हैं तो जल्दी समझ नहीं पायेंगे कि मैं क्यों जल्दी में हूं । जल्दी का जमाना है सब जल्दी में हैं कोई कहीं पहुंचने
 
अफ़लातून
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अयोध्या , १९९२ : कुँवरनारायण

अयोध्या , १९९२ हे राम , जीवन एक कटु यथार्थ है और तुम एक महाकव्य ! तुम्हारे बस की नहीं उस अविवेक पर विजय जिसके दस बीस नहीं अब लाखों सिर - लाखों हाथ हैं और विवेक भी अब न जाने किसके साथ है । इससे बड़ा क्या हो सकता है हमारा दुर्भाग्य एक विवादित स्थल में स
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