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उम्मीद

उम्मीद के रोशनदान पर लगा दिए हैं पहरे बंद कर पलकों को कान खोल लिए हैं हर आहट पर लगता है कि उम्मीद पूरी हो गयी        
 
sangeeta swarup
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सौगातें

मैंने महज़ तुझसे प्यार माँगा था मैंने बस तुझसे वफ़ा चाही थी मैंने तेरी ही खुशियों के लिए अपनी झोली फैलाई थी पर तूने भेज दीं हैं सौगातें मेरे हिस्से की जिसमें हैं तेरी नफरत , रुसवाई औ बेवफाई
 
sangeeta swarup
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सूखे फूल

ख्वाब यूँ ही दफ़न हो जाते हैं ज़िम्मेदारी की किताबों में परत दर परत.. पन्ने पलटो तो झर जाते हैं सूखे फूल की तरह
 
sangeeta swarup
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