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छत्तीसगढ़ में ...(डायरी के कुछ अंश):- - देवाशीष प्रसून

९ दिसंबरसूचना मिली कि १२ और १३ दिसंबर २००९ को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पूरे देश से लगभग पच्चीस नारी अधिकार संगठनों की कार्यकर्त्ताएँ इकट्ठा होने वाली हैं, जो राज्य सत्ता द्वारा किए जाने वाले दमनों के दौरान किए जाने वाली यौन-हिंसा पर अपनी
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छत्तीसगढ़ में हुयी शांति-न्याय यात्रा

देवाशीष प्रसूनएक तरफ, वर्षों से शोषित व उत्पीड़ित आदिवासी जनता ने माओवादियों के नेतृत्व में अपने अधिकारों को हासिल करने के लिये लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को नाकाफी समझते हुये हथियार उठा लिया है। दूसरी तरफ, असंतोष के कारण उपजे विद्रोह के मूल में विद्यमान
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छत्तीसगढ़ के बुध्दिजीवियों को आह्वान

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह ने दो दिन पूर्व दिल्ली के एक कार्यक्रम में कहा कि नक्सल समस्या पर चुनाव आयोग या किसी निष्पक्ष संस्था से पूरे राज्य में जनमत संग्रह करवा लिया जाए। कल उन्होंने फिर कहा कि शांतिवार्ता की बात जो बुध्दिजीवी कर रहे हैं वे ही
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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आखिर चिदंबरम का क्या दोष

अजय प्रकाश कुछ नेताओं, सुरक्षा विशेषज्ञों, बुद्धिजीवियों को छोड़ दें तो सरकार क्या यह नैतिक साहस कभी कर पायेगी कि मारे गये सुरक्षाबलों की जिम्मेदारी चिंदबरम पर सुनिश्चित करे ? दंतेवाड़ा के चिंतलनार में मारे गये 76सुरक्षाबलों की जांच के लिए गृह
 
ajay prakash
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आखिर चिदंबरम का क्या दोष

अजय प्रकाश कुछ नेताओं, सुरक्षा विशेषज्ञों, बुद्धिजीवियों को छोड़ दें तो सरकार क्या यह नैतिक साहस कभी कर पायेगी कि मारे गये सुरक्षाबलों की जिम्मेदारी चिंदबरम पर सुनिश्चित करे ? दंतेवाड़ा के चिंतलनार में मारे गये 76सुरक्षाबलों की जांच के लिए गृह
 
ajay prakash
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तुम्हारी चुप्पियाँ और उनकी हत्यायें

वहाँ की खबरें नहीं आ रही हैं बेसक ये खबरें हत्या और कत्ल के रूप में आयेंगी पर युद्ध की खबरों के चेहरे ऐसे ही होते हैं. उनके लिये और उन सबके लिये सूचना क्रांति असफल हो चुकी है, जो जंगलों की रक्षा महज खनिज संसाधनो की लूट के लिये नहीं करते, जिनके लिये
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छत्तीसगढ़ ३ और एक ग़ज़ल

बढ़िया मंच जमा था रायपुर और आसपास के सभी मीडियाकर्मी व रंगकर्मी होली के रंग में रंगे मस्ती में सराबोर थे संचालक महोदय ने तुरंत मेरा नाम पुकार दिया अनिल भाई ने मुझे तिलक लगा टोपी पहनाई फिर मैंने कविता पढ़ी श्रोता दूसरे ही मूड में थे फिर भी कविता चल गई
 
योगेन्द्र मौदगिल
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छत्तीसगढ़-२

पवन चन्दन जी ने सही फ़रमाया कि बात पानीपत से ही प्रारंभ होती तो बढ़िया रहता सो हे पाठकों मैं इस विवरण को पानीपत से ही शुरू करता हूँ. मेरी व्यस्तताओं के चलते बेटे दिवाकर ने मेरा रेसेर्वेतिओं कराया था और उसने टिकेट भी अपने पास रख ली. २५ कि रात उसने टिकेट
 
योगेन्द्र मौदगिल
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छत्तीसगढ़ के ब्लॉगर हिन्दी ब्लॉग जगत के विकास के लिए एकजुट

छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों से आये व एक अतिथि अभिषेक की उपस्तिथि में यह सम्मेलन प्रारंभ हुआछत्तीसगढ़ ब्लॉगर मीट का आरम्भ प्रेस क्लब के सचिव गोकुल सोनी जी ने सभी उपस्थित ब्लागरों का स्वागत करते हुए किया . उन्होंने ब्लॉग जगत को आने वाले दिनों में एक सशक्त
 
डॉ महेश सिन्हा
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प्रिंट मीडिया में पंकज अवधिया

९ जनवरी, २०१० से एक नया हिन्दी ब्लाग आरम्भ किया है| आप इस कड़ी में जाकर १६० से अधिक पोस्ट देख सकते
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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छत्तीसगढ़ में किसान आत्महत्या

मेरी सरकार ने आते ही “छ्त्तीसगढ़ किसान आयोग” का गठन किया है जो किसानों और खेतिहर मजदूरों के खुशहाली की अनुसंसा करेगा. (छत्तीसगढ़ के प्रथम राज्यपाल दिनेश नंदन सहाय का छत्तीसगढ़ बनने के बाद १५ दिसम्बर २००० को दिये गये जन सम्बोधन से) जब तक हमारे किसान और ख
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तंग पिंजरो मे अघोषित आजीवन कारावास भुगतते वन्य प्राणी और उनसे जुडी बाते

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-65 - पंकज अवधियातंग पिंजरो मे अघोषित आजीवन कारावास भुगतते वन्य प्राणी और उनसे जुडी बातेकल्पना करिये कि आप रोजमर्रा के कामकाज मे लगे है। अचानक ही दूसरे ग्रह के लोग आये और आपको उठा ले। तंग कमरे मे आपको रखे और फिर अगले दिन आपके
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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अहिराज, चिंगराज व भृंगराज से परिचय और साँपो से जुडी कुछ अनोखी बाते

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-64 - पंकज अवधियाअहिराज, चिंगराज व भृंगराज से परिचय और साँपो से जुडी कुछ अनोखी बाते कुछ लोगो को एक स्थान पर खडा देखकर मैने गाडी रोकी। पास जाने पर पता चला कि किसी के घर मे एक साँप घुस गया था। अभी ही उसे मारा गया था। सामने साँप
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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दस्तावेजीकरण की राह तकता भारतीय कृषि से सम्बन्धित पारम्परिक ज्ञान

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-61 - पंकज अवधियादस्तावेजीकरण की राह तकता भारतीय कृषि से सम्बन्धित पारम्परिक ज्ञान रात गहरा रही थी। एक स्थान पर आग जलाकर हम लोग खुले मे बैठे थे। आस-पास कुछ दूरी तक खेत थे और फिर उसके बाद जंगल शुरु होते थे। रात उन बुजुर्ग
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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रोगो को हरने वाली राखियाँ बन्धवाये इस रक्षाबन्धन मे

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-60 - पंकज अवधियारोगो को हरने वाली राखियाँ बन्धवाये इस रक्षाबन्धन मेपारम्परिक चिकित्सको के साथ इस जंगल यात्रा के दौरान जब एक गाँव मे एक और जानकार को साथ लेने के लिये रुके तो पता चला कि वे बीमार है। तेज ज्वर से तडप रहे है। दवाए
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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अच्छे स्वास्थ्य के लिये मच्छरो का प्रयोग, रेडियो साक्षात्कार और अंतरराष्ट्रीय दबाव

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-58 - पंकज अवधिया अच्छे स्वास्थ्य के लिये मच्छरो का प्रयोग, रेडियो साक्षात्कार और अंतरराष्ट्रीय दबाव “हाँ तो बताइये कैसे बनता है मच्छरो का काढा? क्या किलो भर मच्छरो की जरुरत होती है या टन भर? कैसे पीते है इस काढे को?” कनाडा के
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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जैव-विविधता के गढ देवस्थल, अंकोल, झगडहीन, डाफर कान्दा और पारम्परिक चिकित्सक

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-56 - पंकज अवधिया जैव-विविधता के गढ देवस्थल, अंकोल, झगडहीन, डाफर कान्दा और पारम्परिक चिकित्सक हम सपाट मैदानी क्षेत्र मे लगातार चले जा रहे थे। चारो धान के खेत थे। जंगल का नामोनिशान नही था। धान के खेत मे किसान बडी संख्या मे अपने
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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वनस्पतियो का पारम्परिक उपचार और इससे विषैले साँपो से बचाव

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-54 - पंकज अवधिया वनस्पतियो का पारम्परिक उपचार और इससे विषैले साँपो से बचाव कल रात से तेज बारिश शुरु हो गयी है। अब हफ्तो तक घने जंगलो मे जाना मुश्किल हो जायेगा। सडक मार्ग से घने जंगलो को निहारा तो जा सकेगा पर अन्दर घुस पान
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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आप भी मिले मेरे मधुका मित्र से जिन्होने असंख्य लोगो को नया जीवन दिया है

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-53 - पंकज अवधिया आप भी मिले मेरे मधुका मित्र से जिन्होने असंख्य लोगो को नया जीवन दिया है इंटरनेट पर सोशल नेटवर्किग साइटो मे मेरे इन असंख्य मित्रो के नाम नही मिलते है पर फिर भी मै उनसे जुडा हुआ हूँ। इनकी संख्या करोडो मे है
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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कोई तो बचाये मुझे कर्क राशि मे होने वाले इस सूर्य ग्रहण से?

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-52 - पंकज अवधिया कोई तो बचाये मुझे कर्क राशि मे होने वाले इस सूर्य ग्रहण से? 22 जुलाई ,2009 का दिन मेरे लिये बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन सूर्य ग्रहण है। सुबह चार बजे से रात बारह बजे तक का व्यस्त कार्यक्रम है पर मेरी राशि औ
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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हड्डी रोगो की चिकित्सा मे जुटा एक गाँव, खरदा कन्द और संवर्धित ज्ञान की महत्ता

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-50 - पंकज अवधिया हड्डी रोगो की चिकित्सा मे जुटा एक गाँव, खरदा कन्द और संवर्धित ज्ञान की महत्ता इस जंगल यात्रा के दौरान मै एक ऐसे गाँव पहुँचा जहाँ लगभग सभी घरो मे हड्डी रोगो की चिकित्सा होती थी। बडी संख्या मे रोगी यहाँ एकत
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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लाखो की नाग मणियाँ, गोरोचन वाली गायो की हत्या और वशीकरण के दीवाने

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-48 - पंकज अवधिया लाखो की नाग मणियाँ, गोरोचन वाली गायो की हत्या और वशीकरण के दीवाने “मेरे पास दो नाग मणियाँ है। मैने इन्हे बीस लाख रुपये मे खरीदा है। क्या आप इसे एक करोड रुपयो मे बिकवा देंगे?” ये पंक्तियाँ है उन पत्रो मे स
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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साँपो के आगे बेबस जडी-बूटियाँ और घायल साँप के आगे बेबस हम

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-47 - पंकज अवधिया साँपो के आगे बेबस जडी-बूटियाँ और घायल साँप के आगे बेबस हम “ये बीस जडी-बूटियाँ है। आप इन्हे घर ले जाइये और निश्चिंत हो जाइये। एक भी साँप नही आयेगा। आप पन्द्रह हजार रुपये दे दे। मै अभी इसे पालीथीन मे बाँध द
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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साँपो के डर के कारण विलुप्त होती गरुड जडी और इसे बचाने की मुहिम

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-45 - पंकज अवधिया साँपो के डर के कारण विलुप्त होती गरुड जडी और इसे बचाने की मुहिम यदि आपको पता चले कि पूरे जंगल से जो वनस्पति लुप्त हो चुकी है वह पास के गाँव के एक घर मे सुरक्षित है तो आप तुरंत ही उस ओर चल पडेंगे। मैने भी
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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संस्कृतिकर्मियों की शिरकत शर्मनाक:

प्रणय कृष्ण, महासचिव, जन संस्कृति मंच ११-१२ जुलाई को नई दिल्ली मे सम्पन्न हुई जन संस्कृति मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जनांदोलनों और मानवाधिकारों पर क्रूर दमन ढानेवाली छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा १० व ११ जुलाई को प्रायोजित 'प्रमोद वर्मा स्मृति
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जाने किसे झेलना होगा मुम्बई मे कृत्रिम वर्षा के प्रयोग का अभिशाप?

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-43 - पंकज अवधिया जाने किसे झेलना होगा मुम्बई मे कृत्रिम वर्षा के प्रयोग का अभिशाप? कौन-कौन से वृक्ष वर्षा कराते है? इस प्रश्न का जवाब मै सालो से खोज रहा हूँ पर जवाब के रुप मे जिन वृक्षो की सूची मुझे मिल रही है वे जंगल मे
 
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हुंर्रा यदि लकडबघ्घा है, भेडिया नही तो रेवडा क्या है?

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-38 - पंकज अवधिया हुंर्रा यदि लकडबघ्घा है, भेडिया नही तो रेवडा क्या है? बरसात के दिनो मे जब रात मे हमारी गाडी किसी गाँव से गुजरती है तो कुत्ते भौकने लगते है और दूर तक दौडाते है पर इस बार कुछ गाँवो मे ऐसा नही हुआ। मैने इस ब
 
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अच्छे-बुरे भालू, लिंग से बना कामोत्तेजक तेल और निराधार दावे

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-36 - पंकज अवधिया अच्छे-बुरे भालू, लिंग से बना कामोत्तेजक तेल और निराधार दावे क्या ऐसा हो सकता है कि अगल-बगल स्थित दो पहाडियो मे से एक मे अच्छे भालू रहे और दूसरे मे बुरे भालू? बुरे भालू यानि ऐसे भालू जो मनुष्यो पर आक्रमण क
 
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इमली मे काली साडी वाली चुडैल, जिद्दी बैगा और जनविश्वास

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-31 - पंकज अवधिया इमली मे काली साडी वाली चुडैल, जिद्दी बैगा और जनविश्वास “रात के दो-सवा दो बजे थे। जगदलपुर से निकलते समय ही मुझे देर हो गयी थी। सडक पर कम गाडियाँ थी। काँकेर के पास ढाबे मे रुककर चाय पी और मुँह मे पानी के छी
 
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तेन्दुए, जंगली सुअर, भालू, लकडबघ्घे सभी मिलेंगे आपको राजधानी की सडको पर

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-30 - पंकज अवधिया तेन्दुए, जंगली सुअर, भालू, लकडबघ्घे सभी मिलेंगे आपको राजधानी की सडको पर गाँव के चरवाहे को हल्की सी झपकी आ गयी। वह गाँव से दूर मवेशियो को चरा रहा था। जब उसकी नीन्द खुली तो उसने मवेशियो के समूह के बीच कुछ क
 
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चवन्नी दुकाल, कैंसर रोगियो के लिये औषधीय धान और देशी खेती

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने- 24 - पंकज अवधिया चवन्नी दुकाल, कैंसर रोगियो के लिये औषधीय धान और देशी खेती “ पहले यहाँ बहुत घना जंगल हुआ करता था। सभी तरह के जानवर थे। मुझे याद है कि तब सामने वाली गली से बाघ ने हमारे “ मोसी ” (मवेशी) को मार दिया था। साम
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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लौकी, कोल्ही-केकडी और दूसरी वनस्पतियो से बने औषधीय तेल

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-19 - पंकज अवधिया दस जून, 2009 लौकी, कोल्ही-केकडी और दूसरी वनस्पतियो से बने औषधीय तेल जंगल मे साथ चल रहे पारम्परिक चिकित्सको के साथ जब नाना प्रकार के औषधीय तेलो की चर्चा हुयी तो उनमे से कुछ ने रोजमर्रा उपयोग होने वाली सब्ज
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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एक नया कल्पवृक्ष, नये जंगली कीट और बारिश मे मारुति आल्टो

मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-2 - पंकज अवधिया चार जून, 2009 एक नया कल्पवृक्ष, नये जंगली कीट और बारिश मे मारुति आल्टो “यह कल्पवृक्ष है। इसके नीचे ही देवी जी विराजमान है।“घने जंगल मे एक प्राचीन मन्दिर की पूरे मन से सेवा कर रहे एक पुजारी जी ने कहा। मैने
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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एकस्ट्रा-आर्डिनेरी सेक्सुअल परफारमेंसेस : वर्तमान परिपेक्ष्य़ मे यह विशुद्ध भारतीय पारम्परिक ज्ञान कितना प्रासंगिक?

एकस्ट्रा-आर्डिनेरी सेक्सुअल परफारमेंसेस : वर्तमान परिपेक्ष्य़ मे यह विशुद्ध भारतीय पारम्परिक ज्ञान कितना प्रासंगिक? - पंकज अवधिया उस सम्राट की कल्पना करिये जिसने राज-काज के विस्तार के लिये कई विवाह किये है। उस पर राज्य का जबरदस्त बोझ है। उसे रात –दिन
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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अन्ध-विश्वास के साथ मेरी जंग : कुछ अनुभव -98

अन्ध-विश्वास के साथ मेरी जंग : कुछ अनुभव - 98 - पंकज अवधिया नमस्कार , आपसे एक सलाह लेनी है। क्या सचमुच जेड गुडी के मामले मे चिकित्सको ने अपने हाथ खडे कर दिये है ? यदि इन परिस्थितियो मे मै अपने वनस्पति से सम्बन्धित ज्ञान से ब्रिटेन के चिकित्सको के साथ
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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अन्ध-विश्वास के साथ मेरी जंग : कुछ अनुभव -92

अन्ध-विश्वास के साथ मेरी जंग : कुछ अनुभव -92 - पंकज अवधिया छत्तीसगढ अपने तालाबो के लिये पूरी दुनिया मे जाना जाता है। मुझे याद आता है कि जब मैने वनस्पतियो से सम्बन्धित पारम्परिक चिकित्सकीय़ ज्ञान का दस्तावेजीकरण आरम्भ किया था तब से ही मै प्रदेश के अलग-
 
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अन्ध-विश्वास के साथ मेरी जंग : कुछ अनुभव -87

अन्ध-विश्वास के साथ मेरी जंग : कुछ अनुभव -87 - पंकज अवधिया जंगल से दूर एक सितारा होटल मे वातानूकुलित सभागार मे जंगल की बाते हो रही थी। देश के बडे-बडे वन विशेषज्ञ मिनरल वाटर पीते हुये गम्भीर विषयो पर चर्चा कर रहे थे। राष्ट्रीय अभ्यारण्यो की तारीफो के
 
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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